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ईंधन की कीमतों में बदलाव : प्रीमियम पेट्रोल और इंडस्ट्रियल डीजल की बढ़ी दरें, आम जनता सुरक्षित

नई दिल्ली (एजेंसी)। देशभर में ईंधन की कीमतों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। तेल विपणन कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में करीब 2 से 2.3 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है, जबकि औद्योगिक उपयोग वाले थोक डीजल के दाम में लगभग 22 रुपये प्रति लीटर का भारी इजाफा किया गया है। हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

नई दरें 20 मार्च 2026 से लागू हो गई हैं। दिल्ली में प्रीमियम 95 ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत 99.89 रुपये से बढ़कर 101.89 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं थोक औद्योगिक डीजल की कीमत 87.67 रुपये से बढ़कर 109.59 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है।

मध्य पूर्व तनाव का असर

कीमतों में यह बढ़ोतरी वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने के चलते की गई है। हाल ही में पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि बाद में इसमें कुछ गिरावट आई, लेकिन बाजार अब भी अस्थिर बना हुआ है।

किन ईंधनों पर पड़ा असर

इस बढ़ोतरी का असर खास तौर पर ब्रांडेड प्रीमियम पेट्रोल पर पड़ा है। इसमें एचपीसीएल का ‘पावर पेट्रोल’ और आईओसीएल का ‘एक्सपी95’ शामिल हैं। ये ईंधन आमतौर पर बेहतर इंजन परफॉर्मेंस और माइलेज के लिए उपयोग किए जाते हैं।

सरकार का रुख

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया है कि सरकार आम लोगों पर कीमतों का बोझ नहीं डालना चाहती। उन्होंने बताया कि प्रीमियम पेट्रोल कुल बिक्री का केवल 2 से 4 प्रतिशत हिस्सा है, इसलिए इसका असर सीमित रहेगा। साथ ही, सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों को फिलहाल स्थिर रखा गया है।

कंपनियों पर बढ़ा दबाव

भारत अपनी लगभग 88 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। तेल कंपनियां पहले ही ऊंचे दाम के दौरान नुकसान झेल चुकी हैं, हालांकि बाद में कीमतों में गिरावट आने पर उन्होंने मुनाफा भी कमाया।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक स्तर पर तनाव जारी रहता है, तो आने वाले समय में ईंधन कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां मिलकर कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही हैं, ताकि आम जनता पर सीधा असर न पड़े।

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