वैश्विक तनाव की मार : भारतीय शेयर बाजार में ऐतिहासिक गिरावट, निवेशकों के अरबों डूबे

नई दिल्ली (एजेंसी)। मध्य पूर्व में गहराते युद्ध के संकट ने आज भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी है। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण दलाल स्ट्रीट पर ‘ब्लैक मंडे’ जैसा मंजर देखने को मिला। प्रमुख सूचकांकों में भारी बिकवाली के चलते बाजार लहूलुहान होकर बंद हुआ।
बाजार का लेखा-जोखा: सेंसेक्स और निफ्टी धराशायी
आज के कारोबारी सत्र में बाजार खुलते ही गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया था, जो शाम तक जारी रहा:
सेंसेक्स: 2,366 अंकों की भारी गिरावट के साथ 76,552 के स्तर पर सिमटा।
निफ्टी: 717 अंक फिसलकर 23,732 के स्तर पर बंद हुआ।
प्रमुख शेयरों का हाल:
सेंसेक्स के लगभग सभी बड़े शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। विमानन कंपनी इंडिगो के शेयरों में 7% से अधिक की बड़ी गिरावट देखी गई। इसके अलावा टाटा स्टील (5.59%), मारुति (5.40%) और इटरनल (5.19%) जैसे दिग्गज शेयर भी औंधे मुंह गिरे।
सुबह से ही बने रहे मंदी के संकेत
बाजार की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। सुबह 9:15 बजे जब ट्रेडिंग शुरू हुई, तभी सेंसेक्स 1,862 अंक टूट चुका था। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, बिकवाली का दबाव बढ़ता गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर स्थिति इतनी गंभीर थी कि 400 से अधिक स्टॉक्स अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गए, जबकि केवल 249 शेयर ही बढ़त बनाने में कामयाब रहे।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों में हाहाकार
भारतीय बाजार अकेला नहीं था जो इस संकट से जूझ रहा था। युद्ध की आहट ने पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों को हिला दिया है:
जापान: निक्की 225 सूचकांक में 6.22% की बड़ी गिरावट आई।
दक्षिण कोरिया: कोस्पी इंडेक्स 8% से ज्यादा टूट गया, जिससे सैमसंग जैसी बड़ी टेक कंपनियों को भारी नुकसान हुआ।
अमेरिका: वॉल स्ट्रीट के वायदा कारोबार (फ्यूचर्स) में डॉऊ जोन्स और नैस्डैक में भारी गिरावट देखी गई, जो वैश्विक अनिश्चितता को दर्शाती है।
कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
युद्ध के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण सप्लाई रुकने का डर है।
क्रूड ऑयल का प्रकार, वृद्धि (%), वर्तमान कीमत (प्रति बैरल)
ब्रेंट क्रूड,18.03%,$109.40
WTI क्रूड,20.23%,$109.29
विशेषज्ञों की चेतावनी: कतर के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, यदि खाड़ी देशों में युद्ध के कारण उत्पादन ठप होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल तक जा सकती हैं।
















