पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिकी डेटा के बीच सोने-चांदी की चाल : क्या रहेगा अगला रुख?

नई दिल्ली (एजेंसी)। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता और अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों के बीच बुलियन मार्केट (सोना-चांदी) एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कीमतों में बहुत बड़ा उछाल या गिरावट आने के बजाय बाजार एक सीमित दायरे में रह सकता है।
बाजार को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक
अगले सप्ताह निवेशकों की नजर मुख्य रूप से इन तीन पहलुओं पर टिकी रहेगी:
भू-राजनीतिक स्थिति: पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने या घटने का सीधा असर सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने की मांग पर पड़ेगा।
फेडरल रिजर्व के संकेत: अमेरिकी फेड अध्यक्ष जेरोम पॉवेल और अन्य अधिकारियों के बयानों से भविष्य में ब्याज दरों की दिशा स्पष्ट होगी।
आर्थिक आंकड़े: अमेरिका के रोजगार डेटा, विनिर्माण (Manufacturing) के आंकड़े और यूरोज़ोन की महंगाई दर कीमतों की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
पिछले सप्ताह का प्रदर्शन और गिरावट की वजह
पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में करीब 2% की कमी देखी गई, जो 4,492.5 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर हुआ। इसके पीछे कई ठोस कारण रहे:
ETF बिकवाली: गोल्ड ईटीएफ निवेशकों द्वारा की गई प्रॉफिट बुकिंग।
मजबूत डॉलर: अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड में मजबूती ने सोने की चमक को थोड़ा कम किया।
कम भौतिक मांग: ऊंचे भाव और वैश्विक अनिश्चितता के चलते बाजार में खरीदारी सुस्त रही।
वहीं, चांदी ने विपरीत रुख दिखाते हुए हल्की बढ़त दर्ज की और यह 69.79 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई।
भारतीय बाजार की स्थिति
घरेलू बाजार में विदेशी मुद्रा की विनिमय दर (Exchange Rate) ने कीमतों को संतुलित करने का काम किया। रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 94.80 के स्तर पर आ गया, जिससे स्थानीय कीमतों को सहारा मिला।
धातु,समापन भाव (लगभग), साप्ताहिक बदलाव
सोना (10 ग्राम),₹1.44 लाख,मामूली गिरावट
चांदी (1 किलोग्राम),₹2.27 लाख,”₹1,182 की बढ़त”
आगे की राह: क्या उम्मीद करें?
आने वाले सप्ताह में भारतीय बाजारों में कारोबार के दिन कम होंगे। 31 मार्च (महावीर जयंती) और 3 अप्रैल (गुड फ्राइडे) को अवकाश होने के कारण घरेलू बाजार में सुस्ती रह सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक अभी “वेट एंड वॉच” की नीति अपनाएं, क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव बाजार को अस्थिर रख सकते हैं।
















