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गोरखपुर मोतियाबिंद त्रासदी : संक्रमण से गई कई मरीजों की आंखों की रोशनी, एम्स में इलाज जारी

नई दिल्ली (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले (सिकरीगंज) स्थित न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराना कई बुजुर्गों के लिए भारी पड़ गया। 1 और 2 फरवरी को सर्जरी कराने वाले 42 मरीजों में से 22 की हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें दिल्ली एम्स (AIIMS) रेफर करना पड़ा है। संक्रमण का प्रसार इतना घातक है कि डॉक्टरों को कुछ मरीजों की जान बचाने के लिए उनकी आंखें तक निकालनी पड़ी हैं।

घटना का विवरण और भयावह प्रभाव

अस्पताल में सर्जरी के बाद मरीजों की आंखों में मवाद और अत्यधिक दर्द की शिकायत शुरू हुई। डॉक्टरों के अनुसार:

कुल प्रभावित: 42 मरीजों में से 22 गंभीर रूप से संक्रमित।

अंग विच्छेदन: 4 मरीजों की आंखें सर्जरी के जरिए निकालनी पड़ीं ताकि संक्रमण मस्तिष्क (Brain) तक न पहुंचे।

दृष्टि हानि: 6 मरीजों की आंखों की रोशनी पूरी तरह जा चुकी है।

नाजुक स्थिति: कई अन्य मरीजों की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है और वे एम्स में विशेषज्ञों की निगरानी में हैं।

पीड़ितों की आपबीती

बेलघाट की 60 वर्षीय बहाउद्दीन और बारी गांव की देवराजी जैसे कई मरीजों के परिजनों ने बताया कि ऑपरेशन के बाद आंखों से खून और मवाद आने लगा था। डॉक्टरों ने संक्रमण को दिमाग में फैलने से रोकने के लिए सर्जरी को ही एकमात्र विकल्प बताया। अर्जुन सिंह और रामदरश जैसे मरीजों को भी इसी तरह की दर्दनाक स्थिति का सामना करना पड़ा है।

जांच और प्रशासनिक कार्रवाई

इस बड़ी लापरवाही के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट पर है:

सैंपल जांच: बीआरडी मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी टीम ने अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर (OT) से 10 से अधिक नमूने लिए हैं।

ओटी सील: एसीएमओ डॉ. एके चौधरी ने जानकारी दी कि संबंधित अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर को सील कर दिया गया है।

रिपोर्ट का इंतजार: संक्रमण के सटीक कारण का पता लगाने के लिए लैब रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल संचालक राजेश राय का कहना है कि वे वर्षों से सर्जरी कर रहे हैं और ऐसी घटना पहली बार हुई है। फिलहाल, इस हादसे ने निजी अस्पतालों में स्वच्छता मानकों (Sanitation Standards) और संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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