‘पैक्स सिलिका’ का हिस्सा बना भारत : तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में चीन को एक और बड़ी चुनौती

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी सामरिक स्थिति को और मजबूत करते हुए ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) गठबंधन में शामिल होने का आधिकारिक निर्णय लिया है। शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान भारत ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस कदम के साथ ही अमेरिका के नेतृत्व वाले इस महत्वपूर्ण गुट में सदस्य देशों की संख्या अब 10 हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘क्वाड’ के बाद यह गठबंधन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के तकनीकी और आर्थिक दबदबे को सीधी चुनौती दे सकता है।
क्या है ‘पैक्स सिलिका’ और इसकी अहमियत?
‘पैक्स सिलिका’ का मुख्य उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना है। इसकी नींव पिछले वर्ष 12 दिसंबर को वॉशिंगटन में रखी गई थी।
नाम का अर्थ: यहाँ ‘पैक्स’ का तात्पर्य शांति, स्थिरता और समृद्धि से है।
बदलता दौर: अमेरिकी आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेल्बर्ग के अनुसार, जिस तरह 20वीं सदी में तेल और स्टील की महत्ता थी, 21वीं सदी में कंप्यूटर और एआई का बोलबाला है। इन तकनीकों के लिए लिथियम और कोबाल्ट जैसे खनिज अनिवार्य हैं।
साझा विजन: यह गठबंधन ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों, हाई-टेक विनिर्माण और एआई मॉडल्स के लिए एक सुरक्षित इकोसिस्टम तैयार करने पर केंद्रित है।
साझा घोषणापत्र के मुख्य बिंदु
गठबंधन के घोषणापत्र के अनुसार, सभी सदस्य देश तकनीकी प्रगति और आर्थिक सुरक्षा के लिए आपसी सहयोग पर सहमत हुए हैं। साझा बयान में कहा गया है कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘भरोसेमंद सप्लाई चेन’ का होना अनिवार्य है। एआई के क्षेत्र में हो रहे बदलावों से ऊर्जा, हार्डवेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग में विकास के नए द्वार खुलेंगे।
गठबंधन के प्रमुख सदस्य
भारत के शामिल होने से पहले इस समूह में निम्नलिखित देश सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं:
हस्ताक्षरकर्ता: ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इज़राइल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ब्रिटेन।
सहयोगी (बिना हस्ताक्षर के जुड़े): कनाडा, यूरोपीय संघ, नीदरलैंड, ओईसीडी (OECD) और ताइवान।
चीन के एकाधिकार को चुनौती देने की तैयारी
इस गठबंधन का सबसे बड़ा लक्ष्य किसी एक देश (विशेषकर चीन) पर निर्भरता को कम करना है। वर्तमान में ‘रेयर अर्थ मेटल्स’ (दुर्लभ खनिजों) के खनन और आपूर्ति पर चीन का लगभग 60-70% कब्जा है।
दुर्लभ खनिजों की भूमिका: 17 धातुओं का यह समूह आधुनिक हथियारों, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, इलेक्ट्रिक वाहनों, एयरोस्पेस और सेमीकंडक्टर चिप्स के निर्माण के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है।
पैक्स सिलिका के माध्यम से लोकतांत्रिक देश एक वैकल्पिक सप्लाई चेन खड़ी करना चाहते हैं, ताकि भविष्य में तकनीक और व्यापार के नाम पर किसी भी राष्ट्र का शोषण न किया जा सके।
















