भारत-न्यूजीलैंड और कनाडा के साथ व्यापारिक रिश्तों को नई धार : पीएम मोदी का आगामी दौरा

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत अपनी वैश्विक व्यापार कूटनीति को और मजबूत करने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही न्यूजीलैंड की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे, जहां दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर निर्णायक चर्चा होने की संभावना है। हालांकि अभी यात्रा की आधिकारिक तारीखों का ऐलान होना बाकी है, लेकिन इसकी तैयारियां जोरों पर हैं।
हाल ही में विश्व व्यापार संगठन (WTO) की 14वीं मंत्री स्तरीय बैठक के दौरान वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता ने इस दौरे की नींव मजबूत कर दी है।
न्यूजीलैंड दौरे के मुख्य आकर्षण
प्रधानमंत्री की इस यात्रा में एक उच्च स्तरीय व्यापारिक दल भी शामिल होगा। वार्ता के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रह सकते हैं:
आर्थिक साझेदारी: FTA पर हस्ताक्षर करने की दिशा में जारी बातचीत को अंतिम रूप देना।
व्यावहारिक सहयोग: कृषि और खेल के क्षेत्र में संबंधों को विस्तार देना।
कौशल विकास: भारतीय किसानों को कीवी और सेब की आधुनिक खेती का प्रशिक्षण देने जैसे प्रोजेक्ट्स पर सहमति।
भारत-कनाडा व्यापार वार्ता में आएगी तेजी
न्यूजीलैंड के साथ-साथ भारत कनाडा के साथ भी अपने आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी में है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल मई 2026 में कनाडा का दौरा करेंगे।
कनाडा यात्रा के प्रमुख एजेंडे:
CEPA वार्ता: भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) को गति देना।
विविध क्षेत्र: जहाज निर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, पर्यटन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खोलना।
हाई-टेक सेक्टर: एयरोस्पेस, रक्षा, अंतरिक्ष और स्वच्छ ऊर्जा (परमाणु ऊर्जा) में निवेश की संभावनाओं को तलाशना।
WTO (MC-14) में भारत का कड़ा रुख
कैमरून के याउंडे में आयोजित WTO की बैठक में भारत ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से साझा किया। भारत का मानना है कि संगठन को नए मुद्दों पर चर्चा करने से पहले पुराने लंबित वादों, विशेषकर कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
“भारत ने इस बात पर जोर दिया कि विश्व व्यापार संगठन को अपने मूल सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए सर्वसम्मति से निर्णय लेने वाली संस्था के रूप में कार्य करना चाहिए।”
कनाडा ने भारत की इन चिंताओं का सम्मान किया है और दोनों देश भविष्य में रचनात्मक सहयोग के लिए सहमत हुए हैं।
















