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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता : राहुल गांधी ने उठाए कृषि संप्रभुता पर गंभीर सवाल

नई दिल्ली (एजेंसी)। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते (US Trade Deal) को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने इसे भारतीय किसानों के साथ एक “बड़ा धोखा” करार देते हुए आशंका जताई है कि यह सौदा देश की कृषि आत्मनिर्भरता को संकट में डाल सकता है।

अपनी चिंताओं को स्पष्ट करने के लिए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पाँच सीधे सवाल पूछे हैं:

प्रधानमंत्री से पूछे गए 5 प्रमुख सवाल

पशु आहार और डेयरी पर प्रभाव: DDG (डिस्टिलर्स ग्रेन) के आयात का असली मकसद क्या है? क्या अब हमारे पशुओं को अमेरिका से आने वाला जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) मक्का खिलाया जाएगा? क्या इससे हमारा डेयरी क्षेत्र अमेरिकी कंपनियों पर निर्भर नहीं हो जाएगा?

सोया किसानों का भविष्य: यदि भारत भारी मात्रा में GM सोया तेल के आयात को मंजूरी देता है, तो मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के सोयाबीन किसानों का क्या होगा? वे बाजार में कीमतों की इस गिरावट को कैसे सह पाएंगे?

अतिरिक्त उत्पादों का रहस्य: समझौते में ‘अतिरिक्त उत्पादों’ (Additional Products) से क्या तात्पर्य है? क्या भविष्य में दालों और अन्य फसलों के बाजार को भी अमेरिकी दबाव में खोल दिया जाएगा?

नियमों में ढील: ‘नॉन-ट्रेड बैरियर्स’ हटाने के नाम पर क्या भारत को अपनी MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) व्यवस्था, बोनस और खरीद प्रक्रियाओं को कमजोर करने के लिए मजबूर किया जाएगा?

भविष्य की सुरक्षा: एक बार विदेशी आयात के दरवाजे पूरी तरह खुल जाने के बाद, हम अपनी खेती को और अधिक नुकसान होने से कैसे बचाएंगे? क्या हर साल नई फसलों को इस सौदे की बलि चढ़ाया जाएगा?

राजनीतिक घमासान और सरकार का पक्ष

इस व्यापार समझौते को लेकर देश में राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। जहाँ 12 फरवरी को किसान संगठनों और विपक्ष ने ‘भारत बंद’ के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया, वहीं संसद में भी इस मुद्दे पर भारी हंगामा देखने को मिला। विपक्ष की मांग है कि सरकार इस समझौते के सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक करे।

दूसरी ओर, सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है:

पीयूष गोयल और अमित शाह ने विपक्ष के दावों को भ्रामक बताया है।

सरकार का तर्क है कि इस डील से भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर को 45,000 करोड़ रुपये का नया बाजार मिलेगा।

आश्वासन दिया गया है कि डेयरी और कृषि क्षेत्र के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है।

इस डील के तहत भारत कई अमेरिकी उत्पादों पर लगने वाले टैक्स (टैरिफ) को कम या खत्म करेगा। इसके बदले में आईटी, ऊर्जा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। साथ ही, डिजिटल सर्विस टैक्स और सप्लाई चेन को लेकर भी दोनों देश मिलकर काम करने को तैयार हुए हैं।

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