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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर लगा विराम : ट्रंप की टैरिफ नीतियों पर कानूनी संकट का असर

वॉशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका और भारत के बीच होने वाला आगामी व्यापारिक समझौता एक बार फिर अधर में लटक गया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ (शुल्क) संबंधी शक्तियों पर कड़ा रुख अपनाने के बाद, दोनों देशों ने वार्ता को फिलहाल टालने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, वाशिंगटन में होने वाली मुख्य वार्ताकारों की बैठक को अब नए घटनाक्रमों की समीक्षा के बाद फिर से आयोजित किया जाएगा।

वार्ता टलने का मुख्य कारण

भारतीय दल, जिसका नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव दर्पण जैन कर रहे थे, 23 फरवरी से तीन दिवसीय चर्चा शुरू करने वाला था। हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने पूरी स्थिति को बदल दिया है। दोनों देशों के अधिकारियों का मानना है कि व्यापारिक करार को आगे बढ़ाने से पहले अदालत के फैसले के कानूनी और आर्थिक प्रभावों का बारीकी से अध्ययन करना आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और IEEPA विवाद

डोनाल्ड ट्रंप के आर्थिक एजेंडे को तब बड़ा झटका लगा जब शीर्ष अदालत ने अंतरराष्ट्रीय आपात आर्थिक अधिकार कानून (IEEPA) के तहत लगाए गए शुल्कों को अवैध घोषित कर दिया। कोर्ट का मानना है कि राष्ट्रपति ने इस कानून का इस्तेमाल कर अपने संवैधानिक अधिकारों की सीमा लांघी है।

इस अदालती फैसले से पहले की स्थिति इस प्रकार थी:

अगस्त 2025: अमेरिका ने भारत पर 25% जवाबी शुल्क लगाया था।

अतिरिक्त भार: रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25% का और शुल्क लगाया गया, जिससे कुल टैरिफ 50% तक पहुँच गया था।

प्रस्तावित राहत: बातचीत के तहत अमेरिका इसे घटाकर 18% करने पर सहमत हुआ था, लेकिन अब यह समीकरण बदल चुके हैं।

वर्तमान टैरिफ की स्थिति

सुप्रीम कोर्ट के झटके के बावजूद, ट्रंप प्रशासन ने नए सिरे से 15% शुल्क लगाने की घोषणा की है। यदि यह लागू होता है, तो यह ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) शुल्क के अतिरिक्त होगा। सरल शब्दों में कहें तो, यदि किसी वस्तु पर 5% सामान्य शुल्क है, तो नया टैरिफ जुड़कर वह 20% हो जाएगा।

व्यापारिक महत्व की एक झलक

भारत के लिए अमेरिका एक अत्यंत महत्वपूर्ण साझेदार है। व्यापारिक आंकड़े इस महत्व को स्पष्ट करते हैं:

विवरण, सांख्यिकी
द्विपक्षीय व्यापार (FY 2024-25),$186 अरब
भारतीय निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी,लगभग 18%
भारतीय आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी,6.22%

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