वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की ऊँची उड़ान

नई दिल्ली (एजेंसी)। वर्तमान में जहाँ वैश्विक बाज़ार युद्ध और व्यापारिक अनिश्चितताओं के कारण भारी दबाव झेल रहे हैं, वहीं भारत के लिए आर्थिक मोर्चे पर दो बेहद उत्साहजनक खबरें सामने आई हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की हालिया रिपोर्ट्स ने यह स्पष्ट कर दिया है कि साल 2026 में भारत विश्व की सबसे तीव्र गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
संयुक्त राष्ट्र का अनुमान: मजबूत घरेलू मांग है भारत की ढाल
संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम रिपोर्ट ‘विश्व आर्थिक स्थिति और संभावनाएं 2026’ के अनुसार, वैश्विक विकास दर के महज 2.7% तक सीमित रहने की आशंका है। इसके विपरीत, भारत के 6.6% की प्रभावशाली दर से आगे बढ़ने का अनुमान है।
रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत उसकी मजबूत घरेलू मांग है। दुनिया भर में चल रही उथल-पुथल और बदलते व्यापारिक समीकरणों के बावजूद, भारत अपनी आंतरिक खपत और निवेश के दम पर खुद को सुरक्षित रखने में सक्षम रहेगा।
SBI की रिपोर्ट: उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन की संभावना
देश के सबसे बड़े ऋणदाता, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने भारत की प्रगति को लेकर और भी अधिक सकारात्मक रुख अपनाया है। SBI के विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी विकास दर 7.5% तक पहुँच सकती है।
यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार के शुरुआती अनुमानों से भी अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर टैक्स कलेक्शन और सुदृढ़ औद्योगिक गतिविधियों ने राजकोषीय घाटे की चिंताओं को कम कर दिया है, जिससे भारत हर वैश्विक चुनौती का सामना करने के लिए तैयार खड़ा है।
मंदी के साये में भारत क्यों है ‘सुरक्षित द्वीप’?
जहाँ अमेरिका और यूरोपीय देशों में व्यापारिक नीतियों में बदलाव और भू-राजनीतिक तनाव के कारण मंदी का खतरा मंडरा रहा है, वहीं भारत अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए हुए है।
महंगाई पर नियंत्रण: वैश्विक स्तर पर महंगाई ने परिवारों का बजट बिगाड़ा है, लेकिन भारत की नीतियां इसे संतुलित करने में सफल रही हैं।
लगातार वृद्धि: भारत एकमात्र ऐसी बड़ी अर्थव्यवस्था है जो लगातार 6% से अधिक की विकास दर बरकरार रखे हुए है।
जन-साधारण पर सकारात्मक प्रभाव
अर्थव्यवस्था की इस तीव्र रफ्तार का सीधा लाभ आम नागरिक को मिलता है। जब जीडीपी बढ़ती है, तो निवेश के नए रास्ते खुलते हैं जिससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और लोगों की प्रति व्यक्ति आय में सुधार होता है। सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प और मजबूत सप्लाई चेन की वजह से भारतीय बाजार वैश्विक झटकों को सहने के लिए अब पहले से कहीं अधिक परिपक्व हो चुका है।
















