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भारतीय नौसेना की बढ़ेगी ताकत : भारत और जर्मनी के बीच 8 अरब डॉलर के मेगा सबमरीन प्रोजेक्ट पर मुहर संभव

नई दिल्ली (एजेंसी)। रक्षा क्षेत्र में भारत की तीनों सेनाएं लगातार मजबूत होती जा रही हैं. इसी कड़ी में भारतीय रक्षा मंत्रालय और जर्मनी के रक्षा मंत्रालय के बीच अब तक की सबसे बड़ी डील होने जा रही है. जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत दौरे पर आने वाले हैं. भारतीय नौसेना सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात में भारतीय नौसेना के बेड़े के लिए नई पीढ़ी की छह पनडुब्बियों के संयुक्त निर्माण पर सहमति बन सकती है.

भारतीय नौसेना को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास

रक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भारत और जर्मनी के बीच यह डील करीब 8 अरब डॉलर की होगी. जर्मनी की कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स और भारत की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड मिलकर इन पनडुब्बियों का निर्माण करेंगी. भारतीय नौसेना का लक्ष्य वर्ष 2047 तक पूरी तरह आत्मनिर्भर बनना है. यह डील मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई मजबूती देगी. नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इस समझौते में टाइप 214 डीजल इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के निर्माण पर चर्चा होगी, जिनमें एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन तकनीक होगी.

इस डील से भारतीय नौसेना को क्या फायदा होगा?

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस डील से भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ेगी. फिलहाल भारत के पास 16 पारंपरिक पनडुब्बियां हैं, जिनमें से कई 25 साल से ज्यादा पुरानी हैं, जबकि चीन के पास 70 से अधिक आधुनिक पनडुब्बियां हैं. इस डील से न सिर्फ नौसेना को मजबूती मिलेगी बल्कि देश में रोजगार बढ़ेगा और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी भारतीय कंपनियों को भी लाभ होगा.

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