विशाखापत्तनम में भारत का शक्ति प्रदर्शन : राष्ट्रपति मुर्मू आज करेंगी अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक बेड़े का निरीक्षण

विशाखापत्तनम (एजेंसी)। (आंध्र प्रदेश) भारत आज अपनी समुद्री ताकत और रणनीतिक कौशल का लोहा पूरी दुनिया में मनवाने जा रहा है। ‘सिटी ऑफ डेस्टिनी’ के नाम से मशहूर विशाखापत्तनम के तट पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ‘इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू’ (IFR) के माध्यम से भारतीय नौसेना की विशालता और आधुनिकता का जायजा लेंगी। इस गरिमामयी समारोह में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति मंगलवार शाम को ही यहां पहुंच चुकी हैं।
बेड़े की सलामी और आसमान में गर्जना
बुधवार सुबह राष्ट्रपति मुर्मू स्वदेशी युद्धपोत INS सुमेधा पर सवार होकर बंगाल की खाड़ी की लहरों के बीच पहुंचेंगी। वहां वे कतारबद्ध खड़े बेड़े का निरीक्षण करेंगी, जिसमें भारत और मित्र देशों के कुल 71 युद्धपोत और पनडुब्बियां शामिल हैं।
इस अवसर पर नौसेना का हवाई कौशल भी देखने को मिलेगा:
फ्लाई-पास्ट: 50 से अधिक लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर आसमान से राष्ट्रपति को सलामी देंगे।
प्रमुख विमान: मिग-29K, स्वदेशी एलसीए तेजस और लंबी दूरी के टोही विमान P-8I मुख्य आकर्षण होंगे।
विशेष प्रदर्शन: नौसेना के विशेष बल ‘मार्कोस’ (MARCOS) समुद्र के बीच अपनी युद्ध कला और साहस का प्रदर्शन करेंगे।
समुद्री कूटनीति का नया अध्याय
यह आयोजन केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि भारत की ‘समुद्री कूटनीति’ का एक बड़ा केंद्र है। प्रधानमंत्री मोदी के ‘महासागर विजन’ के तहत भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक प्रमुख सुरक्षा भागीदार के रूप में उभर रहा है।
इस दौरान विशाखापत्तनम में दो अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियां भी होंगी:
मिलन (MILAN) 2026: एक विशाल बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास।
हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी: समुद्री सुरक्षा पर चर्चा के लिए एक वैश्विक मंच।
वैश्विक कद और गौरवशाली इतिहास
इस आयोजन में दुनिया के लगभग 65 देशों की नौसेनाएं और कुल 75 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत के बढ़ते प्रभाव का प्रमाण है।
ऐतिहासिक संदर्भ:
भारत में ‘फ्लीट रिव्यू’ की परंपरा 1953 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के समय शुरू हुई थी, जिसमें 33 जहाज शामिल थे। आज यह संख्या और भव्यता कई गुना बढ़ चुकी है। 2016 के बाद विशाखापत्तनम एक बार फिर इस ऐतिहासिक पल का गवाह बन रहा है।
















