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आतंकवाद के विरुद्ध भारत की कठोर नीति : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कड़ा संदेश

तिरुवनंतपुरम (एजेंसी)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के प्रति देश के कड़े रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि वर्तमान भारत ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चलता है। गुरुवार को ‘सैनिक सम्मान सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अब अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए घर में घुसकर प्रहार करने की क्षमता और इच्छाशक्ति रखता है।

आतंकवाद पर कड़ा प्रहार और ‘ऑपरेशन सिंदूर’

रक्षा मंत्री ने देश की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कुछ प्रमुख सैन्य ऑपरेशनों का जिक्र किया:

सर्जिकल और एयर स्ट्राइक: उरी और पुलवामा हमलों के बाद की गई जवाबी कार्रवाइयों ने भारत के बदलते मिजाज को दुनिया के सामने रखा।

ऑपरेशन सिंदूर: राजनाथ सिंह ने हाल ही में पहलगाम की घटना के बाद चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना की। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना ने महज 22 मिनट के भीतर पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

निरंतर सतर्कता: उन्होंने चेतावनी दी कि यह ऑपरेशन अभी समाप्त नहीं हुआ है और सीमा पार से होने वाली किसी भी दुस्साहस का न केवल मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा, बल्कि एक अभूतपूर्व कार्रवाई भी की जाएगी।

समुद्री शक्ति और 2047 का लक्ष्य

रक्षा मंत्री ने भारत की समुद्री ताकत को भविष्य की अनिवार्य जरूरत बताया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु रहे:

शक्तिशाली नौसेना: भारत का लक्ष्य 2047 तक अपनी नौसेना को विश्व की सबसे बड़ी और आधुनिकतम नौसेना बनाना है।

तकनीक और परंपरा: भारत अपने प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक के मेल से आगे बढ़ रहा है।

स्वदेशी निर्माण: कोचीन शिपयार्ड में निर्मित देश के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जहाज निर्माण के क्षेत्र में भारत अब वैश्विक शक्तियों के बराबर खड़ा है।

सैनिकों का सम्मान और राजनीतिक प्रहार

राजनाथ सिंह ने पूर्व सैनिकों के कल्याण को सरकार का नैतिक दायित्व बताया। उन्होंने कहा कि ‘वन रैंक वन पेंशन’ (OROP) की दशकों पुरानी मांग को वर्तमान सरकार ने पूरी ईमानदारी से लागू किया।

शहीदों को नमन करते हुए उन्होंने मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के बलिदान को याद किया। इस दौरान उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उस समय वीर शहीदों के बलिदान को वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। उन्होंने आगे बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में वॉर मेमोरियल (युद्ध स्मारक) बनाए जा रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां हमारे सैनिकों के शौर्य से प्रेरणा ले सकें।

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