मध्यप्रदेश

इंदौर के विकास को मिली नई गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया ₹1356 करोड़ की नर्मदा परियोजना का शिलान्यास

भोपाल (एजेंसी)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर को जल और विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात दी है। इंदौर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नर्मदा जल परियोजना के चतुर्थ चरण का भूमि-पूजन किया। अमृत 2.0 योजना के तहत ₹1356 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना से इंदौर की भविष्य की पेयजल जरूरतों को मजबूती मिलेगी।

जल संरक्षण और विकास के मुख्य बिंदु

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि माँ नर्मदा मध्य प्रदेश की भाग्य रेखा है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए होलकर साम्राज्य के योगदान को याद किया और बताया कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नर्मदा परियोजनाओं ने नई ऊंचाइयों को छुआ है।

कार्यक्रम की प्रमुख घोषणाएं और लोकार्पण:

नर्मदा चतुर्थ चरण: ₹1356 करोड़ के निवेश से इंदौर के वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाया जाएगा।

एसटीपी प्लांट: रामसर साइट सिरपुर में ₹62.72 करोड़ की लागत से निर्मित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का लोकार्पण किया गया।

संकल्प से समाधान: इस अभियान के तहत इंदौर जिले के 1.44 लाख से अधिक लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ सौंपा गया।

आगामी परियोजनाएं: केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC) परियोजनाओं से प्रदेश के बड़े हिस्से में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ेगी।

भविष्य का इंदौर: 2045 तक की योजना

मुख्यमंत्री ने भविष्य के विजन को साझा करते हुए कहा कि इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र आने वाले समय में देश का दूसरा सबसे बड़ा महानगरीय क्षेत्र बनेगा। इंदौर की बढ़ती आबादी (अनुमानित 65 लाख) को ध्यान में रखते हुए अगले 25 वर्षों के लिए जल प्रबंधन की रूपरेखा तैयार की गई है। 2029 तक शहर को 900 एमएलडी (MLD) पानी मिलने लगेगा।

विशेष उल्लेख: मुख्यमंत्री ने “जल गंगा संवर्धन अभियान” की शुरुआत की चर्चा की, जिसके तहत प्रदेश भर के पारंपरिक जल स्रोतों जैसे कुएं, बावड़ी और तालाबों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। साथ ही, सिंहस्थ-2028 के लिए शिप्रा नदी को निर्मल बनाने का संकल्प दोहराया।

जनप्रतिनिधियों का संबोधन

कैलाश विजयवर्गीय (नगरीय विकास मंत्री): उन्होंने इसे इंदौर के इतिहास का स्वर्णिम दिन बताया और वैज्ञानिकों व इंजीनियरों के उस संघर्ष को याद किया जिसने इंदौर जैसे ऊंचे पठार पर नर्मदा का जल लाना संभव बनाया।

तुलसीराम सिलावट (जल संसाधन मंत्री): उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य 2028-29 तक राज्य की सिंचाई क्षमता को 100 लाख हेक्टेयर तक पहुँचाना है।

पुष्यमित्र भार्गव (महापौर): उन्होंने कहा कि यह परियोजना ‘हरित इंदौर’ के सपने को साकार करेगी और 2045 तक पानी की समस्या का स्थायी समाधान देगी।

इस अवसर पर विभिन्न विकास प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री ने संतों का आशीर्वाद लिया और नर्मदा जल का पूजन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।

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