स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान की नई रणनीति : अब हर बैरल पर ‘क्रिप्टो टोल’ की तैयारी

ईरान (एजेंसी)। अमेरिका के साथ जारी युद्धविराम के बीच ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे संवेदनशील रास्ते, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, पर अपना नियंत्रण और कड़ा कर दिया है। तेहरान ने अब इस जलमार्ग से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर 1 डॉलर प्रति बैरल का नया शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। दिलचस्प बात यह है कि ईरान ने इस भुगतान के लिए डॉलर के बजाय क्रिप्टोकरंसी (जैसे बिटकॉइन) को अनिवार्य करने की योजना बनाई है।
निगरानी और तलाशी के कड़े नियम
ईरान के तेल और गैस निर्यात संघ के अनुसार, अब इस मार्ग से गुजरने वाले प्रत्येक जहाज की सघन तलाशी ली जाएगी। ईरान का तर्क है कि वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि युद्धविराम की आड़ में हथियारों की तस्करी न हो।
प्रक्रिया की नई रूपरेखा:
ईमेल घोषणा: जहाजों को प्रवेश से पहले अपने माल की पूरी जानकारी ईमेल द्वारा भेजनी होगी।
त्वरित भुगतान: टोल की गणना के बाद भुगतान के लिए बहुत सीमित समय दिया जाएगा।
सुरक्षा जांच: पूरी तलाशी और हरी झंडी मिलने के बाद ही टैंकर आगे बढ़ सकेंगे।
समंदर में बढ़ता तनाव और ‘पार्किंग लॉट’ जैसे हालात
ईरान की इस सख्ती ने फारस की खाड़ी में जहाजों की लंबी कतारें लगा दी हैं। वर्तमान में लगभग 400 तेल टैंकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, जिससे वहां का दृश्य किसी विशाल पार्किंग लॉट जैसा हो गया है।
चेतावनी: रेडियो संदेशों के माध्यम से जहाजों को लगातार आगाह किया जा रहा है कि बिना अनुमति या टोल भुगतान के आगे बढ़ने की कोशिश करने पर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीतिक गतिरोध
ईरान के इस कदम से दुनिया भर के तेल बाजारों में हड़कंप मच गया है। ‘मर्स्क’ जैसी बड़ी शिपिंग कंपनियां फिलहाल “वेट एंड वॉच” की स्थिति में हैं।
प्रमुख चुनौतियां:
अंतरराष्ट्रीय कानून: ओमान जैसे पड़ोसी देशों ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत इस रास्ते पर कोई टैक्स नहीं वसूला जा सकता।
अमेरिका का रुख: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी शांति समझौते की पहली शर्त इस जलमार्ग का पूरी तरह और सुरक्षित रूप से खुला रहना है।
ईरान का यह नया ‘टोल रूल’ न केवल अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता में बाधा बन सकता है, बल्कि वैश्विक तेल कीमतों को भी अस्थिर करने की क्षमता रखता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि क्या ईरान अंतरराष्ट्रीय दबाव में पीछे हटता है या अपनी जिद पर अड़ा रहता है।
















