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ईरान में जनविद्रोह : हिंसक झड़पों में भारी हताहत, दमनकारी नीतियों से बढ़ा तनाव

तेहरान (एजेंसी)। ईरान में आर्थिक बदहाली और प्रशासनिक सख्ती के खिलाफ शुरू हुआ जनआक्रोश अब एक खूनी संघर्ष में तब्दील हो चुका है। राजधानी तेहरान समेत देश के विभिन्न हिस्सों से आ रही खबरें विचलित करने वाली हैं। बताया जा रहा है कि देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई द्वारा सुरक्षा बलों को ‘कठोरतम कार्रवाई’ के निर्देश मिलने के बाद हिंसा में तेजी आई है। अपुष्ट रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों की गोलीबारी में अब तक 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

अस्पतालों में बढ़ती लाशें और अंतरराष्ट्रीय चिंता

स्थानीय सूत्रों और चिकित्सा कर्मियों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, अकेले तेहरान के कुछ प्रमुख अस्पतालों में ही 200 से अधिक शव पहुंचे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चलाईं, जिसमें मरने वालों में युवाओं की तादाद सबसे ज्यादा है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों ने अभी तक लगभग 63 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है, क्योंकि इंटरनेट और संचार सेवाएं बाधित होने के कारण सटीक आंकड़े जुटाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

इंटरनेट ब्लैकआउट और संचार बंदी

ईरान के कई प्रांतों में संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इस ‘डिजिटल ब्लैकआउट’ के जरिए जमीनी हकीकत को दुनिया से छिपाने की कोशिश कर रही है। जब से फोन और इंटरनेट सेवाएं बंद हुई हैं, तब से अफवाहों और डर का माहौल और गहरा गया है।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी

इस संकट ने वैश्विक कूटनीति में भी उबाल ला दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि निर्दोष प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की जा रही हिंसा के गंभीर परिणाम होंगे। वहीं, दूसरी ओर ईरानी नेतृत्व ने इसे बाहरी हस्तक्षेप बताते हुए झुकने से इनकार कर दिया है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के अधिकारियों ने तो प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा तक की धमकी दे डाली है।

आखिर क्यों सुलग रहा है ईरान?

ईरान में जनता के सड़कों पर उतरने की मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:

आर्थिक संकट: बढ़ती महंगाई और मुद्रा (Currency) की गिरती कीमत।

बेरोजगारी: युवाओं के पास रोजगार के साधनों का अभाव।

बुनियादी ढांचे का विनाश: विरोध की आग में 25 से अधिक मस्जिदें, 26 बैंक और दर्जनों सरकारी इमारतें जलकर खाक हो चुकी हैं।

छात्रों और व्यापारियों का एकजुट विरोध

यह आंदोलन अब केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं रहा है। विश्वविद्यालयों के छात्रों से लेकर बाजार के व्यापारियों तक, सभी इस व्यवस्था परिवर्तन की मांग कर रहे हैं। अब तक 2,300 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा चुका है, लेकिन जनता का गुस्सा थमता नजर नहीं आ रहा है। कई शहरों में अब सशस्त्र और नकाबपोश लोग भी सड़कों पर देखे जा रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि स्थिति अब नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।

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