देश-विदेश

कानून व्यवस्था संभल नहीं रही और दोष हमें दे रहे हो : यूनुस सरकार को भारत का जवाब

नई दिल्ली (एजेंसी)। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बावजूद बांग्लादेश में आए दिन हिंसा की घटनाएँ सामने आ रही हैं। इस अशांति को नियंत्रित करने में विफल रहने पर, पड़ोसी देश की अंतरिम सरकार भारत पर दोष मढ़ने की कोशिश कर रही है। हालांकि, भारत ने इस तरह के आरोपों को सख्त लहजे में खारिज करते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।

भारत ने आरोपों को बताया ‘झूठा और निराधार’

शुक्रवार को, भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक वरिष्ठ बांग्लादेशी अधिकारी के उस दावे को “झूठा और निराधार” करार दिया, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश में हुई हिंसक झड़पों में भारत की संलिप्तता की बात कही थी।

पिछले सप्ताह बांग्लादेश के चटगांव पहाड़ी क्षेत्र के खगराछारी ज़िले में हुई झड़पों के बाद, ‘गृह मंत्री’ जहांगीर आलम चौधरी ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि भारत इस अशांति को बढ़ावा दे रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत इन “झूठे और निराधार आरोपों” को पूरी तरह से अस्वीकार करता है।

आंतरिक अशांति का दोष दूसरों पर मढ़ना

प्रवक्ता जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान चौधरी की टिप्पणी से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, “बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अपनी असमर्थता के कारण, अंतरिम सरकार नियमित रूप से अपना दोष किसी और पर थोपने का प्रयास करती रही है।”

ज्ञात हो कि पिछले सप्ताह खगराछारी जिले में एक लड़की के साथ कथित बलात्कार के बाद हिंसा भड़क उठी थी। बीते रविवार को हुई झड़पों में तीन आदिवासी पुरुषों की हत्या कर दी गई थी।

अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं के विरुद्ध बढ़ी हिंसा

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से हिंदुओं के विरुद्ध हिंसा की घटनाओं में पिछले साल शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से काफी वृद्धि देखी गई है।

मानवाधिकार संगठन राइट्स एंड रिस्क्स एनालिसिस ग्रुप (RRAG) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2024 से फरवरी 2025 के बीच 1,254 हिंसक घटनाएँ दर्ज की गईं, जिनमें से अधिकांश में हिंदू समुदाय प्रभावित हुआ। संयुक्त राष्ट्र की एक तथ्य-खोज (फैक्ट-फाइंडिंग) रिपोर्ट में भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों का उल्लेख किया गया है।

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