कृषि, परंपरा और नवाचार के समन्वय से मध्यप्रदेश बना कृषि विकास का अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल (एजेंसी)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर के जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित ‘कृषि मंथन’ कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रदेश के कृषि परिदृश्य को नई दिशा दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार खेती को न केवल लाभ का धंधा बनाने, बल्कि इसे आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ने के लिए पूरी तरह समर्पित है।
खेती, संस्कृति और नवाचार
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कृषि को भारतीय जीवन पद्धति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में खेती और संबंधित व्यवसायों को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। कार्यक्रम की कुछ मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
समृद्ध किसान – समृद्ध मध्यप्रदेश: इसी संकल्प के साथ पूरे वर्ष प्रदेश में ‘कृषि उत्सव’ मनाया जा रहा है।
परंपरा और अनुसंधान का मेल: प्राचीन शैलचित्रों से लेकर आधुनिक प्रयोगशालाओं तक, भारत में खेती का इतिहास गौरवशाली रहा है। अब ‘जय अनुसंधान’ के मंत्र के साथ वैज्ञानिक खेती पर जोर दिया जा रहा है।
प्राकृतिक खेती में अव्वल: मध्यप्रदेश वर्तमान में देश का अग्रणी प्राकृतिक कृषि राज्य है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बाबा महाकाल के प्रसाद के रूप में रागी (मिलेट्स) का उपयोग इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
दुग्ध उत्पादन का लक्ष्य: राज्य में वर्तमान 9% दुग्ध उत्पादन को बढ़ाकर 20% करने का लक्ष्य है। साथ ही, स्कूली बच्चों को पोषण के लिए नि:शुल्क दूध देने की योजना भी शुरू की गई है।
विकास कार्यों की सौगातें (कुल लागत ₹23 करोड़ से अधिक)
मुख्यमंत्री ने जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए कई बुनियादी ढांचों का उद्घाटन किया:
परियोजना, विवरण
नया प्रशासनिक भवन,जवाहरलाल नेहरू कृषि वि.वि. में ₹13 करोड़ की लागत से निर्मित।
अनुसंधान केंद्र,बोहानी में गन्ना अनुसंधान केंद्र का प्रशासनिक कार्यालय।
कौशल विकास,वारासिवनी (बालाघाट) में कृषि महाविद्यालय का नया केंद्र।
जैव उर्वरक केंद्र,जबलपुर में स्वचालित तरल बायो-फर्टिलाइजर उत्पादन इकाई।
स्टार्ट-अप्स और किसानों को प्रोत्साहन
तकनीक को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने 10 कृषि स्टार्ट-अप्स को 10 करोड़ रुपये से अधिक के स्वीकृति पत्र सौंपे। इसके अलावा:
कृषि सखी कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
किसानों को गेहूं पर ₹2625 प्रति क्विंटल का दाम दिया जा रहा है, जिसे ₹2700 तक ले जाने का लक्ष्य है।
सरसों उत्पादकों को भी अब ‘भावांतर योजना’ का लाभ मिलेगा।
वैज्ञानिक संवाद और भविष्य की रणनीति
मुख्यमंत्री ने कृषि वैज्ञानिकों के साथ सीधा संवाद किया। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य “खेत से कारखाने तक” की दूरी को कम करना था। विशेषज्ञों ने निम्नलिखित तकनीकी पहलुओं पर जोर दिया:
कम पानी में अधिक उपज देने वाली फसलों की किस्में।
कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग।
पशुपालन और चारे के बेहतर प्रबंधन से अतिरिक्त आय।
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय ने हाल ही में चिन्नौर धान (बालाघाट) और सुंदरजा आम (रीवा) के लिए GI टैग प्राप्त कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।
“हमारा लक्ष्य केवल बुनियादी सुविधा देना नहीं, बल्कि किसानों को आधुनिक तकनीक और बेहतर मार्केट लिंकेज से सशक्त बनाना है।” – डॉ. मोहन यादव
















