धमतरी में नक्सलियों का बड़ा सरेंडर : 47 लाख के इनामी 9 हार्डकोर माओवादियों ने छोड़ी हिंसा की राह

धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान को उस वक्त एक ऐतिहासिक कामयाबी मिली, जब प्रतिबंधित माओवादी संगठन के 9 सक्रिय सदस्यों ने सामूहिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया। इन नक्सलियों पर कुल 47 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इन्होंने न केवल हथियार डाले, बल्कि समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प भी लिया।
समर्पण का नेतृत्व: रायपुर आईजी अमरेश मिश्रा और धमतरी एसपी सूरज सिंह परिहार की मौजूदगी में नक्सलियों ने हथियार सौंपे।
हथियारों की बरामदगी: सरेंडर के दौरान माओवादियों ने इंसास, एसएलआर, कार्बाइन और भरमार जैसे घातक हथियारों के साथ भारी मात्रा में जिंदा कारतूस और मैगजीन भी पुलिस के हवाले किए।
सक्रिय क्षेत्र: ये नक्सली मुख्य रूप से उड़ीसा राज्य कमेटी के तहत नगरी, सीतानदी, मैनपुर और गोबरा जैसे संवेदनशील इलाकों में सक्रिय थे।
बदलाव के पीछे की वजह
पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह सफलता किसी एक दिन का परिणाम नहीं है। इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारक रहे हैं:
बढ़ता दबाव और सुरक्षा कैंप: सुरक्षाबलों द्वारा जंगलों के भीतर तक चलाए जा रहे निरंतर अभियानों से नक्सली बैकफुट पर हैं।
माओवादी खोखलापन: जंगलों में अमानवीय जीवन और संगठन की भेदभावपूर्ण विचारधारा से कैडरों का मोहभंग हो रहा है।
जागरूकता अभियान: पुलिस द्वारा चलाए गए खेल कार्यक्रमों, पोस्टरों और सिविक एक्शन प्रोग्राम ने ग्रामीणों और नक्सलियों के बीच संवाद का रास्ता खोला।
सरकारी योजनाएं: शासन की ‘पुनर्वास नीति’ से प्रभावित होकर इन युवाओं ने हिंसा छोड़ बेहतर भविष्य चुनने का फैसला किया।
“हम जिले में सक्रिय अन्य माओवादियों से भी अपील करते हैं कि वे हिंसा का रास्ता त्यागकर सरकार की आत्मसमर्पण नीति का लाभ उठाएं और मुख्यधारा में शामिल हों।” — सूरज सिंह परिहार, एसपी धमतरी
आने वाले समय में इस सफलता से क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क के और कमजोर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
















