मध्यप्रदेश

शिक्षा और सामाजिक सुधार के पथ पर मीना समाज : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल (एजेंसी)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित ‘मीना समाज सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए समाज की प्रगतिशील सोच की सराहना की। उन्होंने कहा कि मीना समाज ने न केवल शिक्षा और उत्कृष्टता को अपना मार्गदर्शक माना है, बल्कि सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध भी एक सशक्त उदाहरण पेश किया है।

प्रमुख बिंदु: मुख्यमंत्री के संबोधन की मुख्य बातें

सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार: मुख्यमंत्री ने मृत्यु भोज जैसी पुरानी परंपराओं के विरोध और दहेज मुक्त, सादे सामूहिक विवाहों को प्रोत्साहन देने के लिए समाज की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे सुधार राष्ट्र निर्माण में सहायक होते हैं।

शिक्षा पर जोर: पिछले वर्षों में 550 से अधिक मेधावी छात्रों का सम्मान इस बात का प्रतीक है कि समाज शैक्षणिक उन्नति को प्राथमिकता दे रहा है।

मीनेष बोर्ड का गठन: डॉ. यादव ने घोषणा की कि राज्य सरकार ‘मीनेष बोर्ड’ के गठन पर गंभीरता से विचार कर रही है और सामाजिक धर्मशाला के निर्माण में भी शासन द्वारा पूर्ण सहयोग दिया जाएगा।

आर्थिक सशक्तिकरण: सरकार पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के जरिए किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने युवाओं से उद्यमिता और उद्योगों के क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।

प्रतिभाओं और वरिष्ठों का सम्मान

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल करने वाले समाज के 16 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इसके साथ ही, सामाजिक कार्यों और दान के माध्यम से समाज सेवा करने वाले वरिष्ठ नागरिकों का भी अभिनंदन किया गया।

संगठन की ओर से मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया गया, जिसमें उन्हें साफा बांधकर और अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री विश्वास सारंग और राज्य मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर भी उपस्थित रहीं।

विकास और विरासत का संगम

मुख्यमंत्री ने समाज की ऐतिहासिक जड़ता का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार से जुड़ी इस समाज की उत्पत्ति जल और जीवन के महत्व को दर्शाती है। उन्होंने केंद्र सरकार की ‘नदी जोड़ो परियोजनाओं’ का जिक्र करते हुए बताया कि इससे चंबल और मालवा क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा, जिनमें मीना समाज की बड़ी भागीदारी है।

“मीना समाज अपनी मेहनत और ईमानदारी के लिए जाना जाता है। जातिगत जनगणना जैसे निर्णयों से भविष्य में कई उलझे हुए सवालों के समाधान मिलेंगे और समाज को विकास की नई दिशा प्राप्त होगी।” — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री

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