मिडिल ईस्ट संकट : क्या 45 दिनों का युद्धविराम लाएगा शांति? ट्रंप की चेतावनी के बीच कूटनीति तेज

नई दिल्ली (एजेंसी)। मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष अब अपने दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। 33 दिनों की भीषण जंग के बाद, जहाँ एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर कड़े हैं, वहीं दूसरी ओर पर्दे के पीछे से युद्ध को रोकने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए आगामी 48 घंटे बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं।
युद्धविराम का प्रस्तावित खाका: दो चरणों की योजना
‘
एक्सियोस’ की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के माध्यम से एक संभावित समझौते पर चर्चा चल रही है। इस प्रस्तावित शांति योजना को मुख्य रूप से दो चरणों में बांटा गया है:
प्रथम चरण (45 दिनों का विराम): शुरुआत में 45 दिनों के लिए सीजफायर किया जाएगा। इस अवधि का उपयोग युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने की शर्तों पर चर्चा के लिए होगा।
द्वितीय चरण (स्थायी समझौता): यदि शुरुआती बातचीत सफल रहती है, तो दूसरे चरण में युद्ध समाप्ति पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर इस अस्थायी युद्धविराम की अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है।
मध्यस्थों की भूमिका और ट्रंप की डेडलाइन
इस जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया में पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। खबरों के मुताबिक, ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है।
हालाँकि, शांति की इन कोशिशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान के पास मंगलवार शाम तक का समय है। यदि ईरान ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से पाबंदियां नहीं हटाता, तो अमेरिका ईरान के बुनियादी ढांचे और पावर प्लांट्स पर बड़े हमले कर सकता है।
प्रमुख चुनौतियां और वैश्विक असर
समझौते की राह में कुछ बड़े अवरोध अभी भी बरकरार हैं:
यूरेनियम का मुद्दा: मध्यस्थों का मानना है कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को देश से बाहर निकालने या उसे नष्ट करने पर सहमति केवल अंतिम समझौते के बाद ही बन पाएगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि वे खाड़ी क्षेत्र में किसी भी नए सुरक्षा समीकरण को स्वीकार नहीं करेंगे। होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के कड़े नियंत्रण के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
निष्कर्ष: दुनिया की नजरें अब मंगलवार की डेडलाइन पर टिकी हैं। क्या कूटनीति काम करेगी या मिडिल ईस्ट एक और बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ेगा, यह आने वाले कुछ घंटे तय करेंगे।
















