मध्य पूर्व में तनाव कम करने की पहल : ट्रंप और ईरान के बीच 14 दिनों के युद्धविराम पर सहमति

तेहरान (एजेंसी)। तेहरान और वाशिंगटन के बीच जारी भारी गतिरोध के बीच एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिलती दिख रही है। ईरान ने बुधवार को घोषणा की है कि वह अपनी सैन्य गतिविधियों पर तब तक रोक लगाने के लिए तैयार है, जब तक उस पर कोई बाहरी हमला नहीं होता। इस सकारात्मक रुख के साथ ही, ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को दो सप्ताह के लिए अस्थायी रूप से खोलने का निर्णय लिया है।
ईरानी विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि यह कदम मौजूदा शांति वार्ताओं को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। उनके अनुसार, इस 14-दिवसीय अवधि के दौरान व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान किया जाएगा, हालांकि इसके लिए ईरानी सेना के साथ उचित समन्वय अनिवार्य होगा।
सहमति के मुख्य बिंदु
इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के पीछे दोनों देशों के बीच प्रस्तावों का आदान-प्रदान मुख्य कारण रहा है:
प्रस्तावों पर चर्चा: ईरान ने यह कदम तब उठाया जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान द्वारा दिए गए 10-सूत्रीय प्रस्ताव को बातचीत के आधार के रूप में स्वीकार कर लिया। बदले में, अमेरिका ने भी अपना 15-सूत्रीय एजेंडा पेश किया है।
शर्तों पर आधारित नरमी: अराघची ने जोर देकर कहा कि ईरान की रक्षात्मक कार्रवाई केवल तभी रुकी रहेगी जब विपक्ष की ओर से उकसावे वाली कार्रवाई बंद हो।
सामरिक मार्ग का खुलना: वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति देना इस समझौते का सबसे बड़ा हिस्सा माना जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप का बयान और भविष्य की दिशा
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस पर अपनी मुहर लगाते हुए ईरान पर होने वाले संभावित हमलों को दो सप्ताह के लिए स्थगित करने का ऐलान किया है। ट्रंप ने इसे ‘दोतरफा युद्धविराम’ करार देते हुए कहा कि यदि ईरान इस मार्ग को सुरक्षित रखने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी करता है, तो अमेरिका शांति की दिशा में आगे बढ़ेगा।
ट्रंप ने विश्वास जताया कि अमेरिकी सेना ने अपने प्राथमिक लक्ष्य पूरे कर लिए हैं और अब ध्यान एक स्थायी शांति समझौते पर है। उन्होंने संकेत दिया कि अधिकांश विवादित बिंदुओं पर आम सहमति बन चुकी है और अगले 14 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौता होने की प्रबल संभावना है। यह मध्य पूर्व में स्थिरता लाने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को तेल संकट से बचाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
















