‘मिनी ईरान’ में छाया मातम : अयातुल्लाह खामेनेई के निधन पर कर्नाटक के इस गाँव ने घोषित किया तीन दिवसीय बंद

नई दिल्ली (एजेंसी)। चिक्कबल्लापुर, भारत — ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु की सूचना मिलते ही मध्य-पूर्व के साथ-साथ भारत के एक छोटे से गाँव में भी सन्नाटा पसर गया है। कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले में स्थित अलीपुर गाँव, जिसे अपनी शिया बहुलता के कारण अक्सर ‘मिनी ईरान’ कहा जाता है, ने अपने आध्यात्मिक नेता के सम्मान में तीन दिनों के स्वैच्छिक बंद का आह्वान किया है।
गाँव में थमी ज़िंदगी की रफ़्तार
रविवार की सुबह जैसे ही खामेनेई के निधन की खबर अलीपुर पहुँची, पूरे गाँव की गतिविधियों पर विराम लग गया। स्थानीय बाज़ार, निजी प्रतिष्ठान और यहाँ तक कि सड़कों पर लगने वाली दुकानें भी पूरी तरह बंद रहीं। गाँव के निवासी सड़कों और चौराहों पर एकत्रित होकर शोक मनाते देखे गए। कई लोगों के हाथों में खामेनेई के चित्र थे और वातावरण गमगीन था।
विरोध प्रदर्शन और धार्मिक एकजुटता
दोपहर के समय अंजुमन-ए-जाफरिया कमेटी के नेतृत्व में एक विशाल विरोध मार्च निकाला गया। काले वस्त्र धारण किए ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से अपना दुख व्यक्त किया। स्थानीय धर्मगुरुओं ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे एक बड़ी क्षति बताया।
अलीपुर और ईरान के बीच का गहरा नाता
अलीपुर का ईरान से जुड़ाव केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे ऐतिहासिक और भावनात्मक कारण भी हैं:
ऐतिहासिक नाम: पूर्व में ‘बेल्लिकुंटे’ के नाम से जाने जाने वाले इस गाँव का नाम आदिलशाही काल के दौरान शिया प्रभाव के कारण ‘अलीपुर’ पड़ा।
ऐतिहासिक दौरा (1986): ग्रामीणों के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्मृति 1986 की है, जब खामेनेई ने (तत्कालीन राष्ट्रपति के रूप में) इस गाँव का दौरा किया था और एक स्थानीय अस्पताल की नींव रखी थी।
सांस्कृतिक संबंध: यहाँ के कई परिवारों का व्यापारिक और शैक्षणिक नाता सीधे ईरान से है, जिससे दोनों के बीच एक मज़बूत आध्यात्मिक सेतु बना हुआ है।
स्थानीय निवासी का बयान: “हमारा उनसे रिश्ता दशकों पुराना है। 1986 में उनका यहाँ आना हमारे लिए एक ऐतिहासिक गौरव की बात थी। आज हम केवल एक नेता नहीं, बल्कि अपना मार्गदर्शक खो चुके हैं।”
गाँव के लोगों का मानना है कि सीमाओं से परे यह शोक उनकी गहरी आस्था और उस अटूट रिश्ते का प्रतीक है जो दशकों पहले शुरू हुआ था।
















