मध्यप्रदेश

प्राकृतिक खेती से लागत कम और बाहरी निर्भरता कम होती है : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

रीवा (एजेंसी)। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने प्राकृतिक खेती को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए क्रांतिकारी बताया है। रविवार को रीवा के हरिहरपुर स्थित अपने फार्म हाउस पर फसलों का निरीक्षण करते हुए उन्होंने कहा कि यह पद्धति न केवल खेती की लागत को न्यूनतम करती है, बल्कि किसानों को बाजार पर निर्भर रहने की मजबूरी से भी मुक्त करती है।

मुख्य बिंदु: खेती और स्वास्थ्य का संगम

उप मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं:

भारतीय जीवन पद्धति: प्राकृतिक खेती महज एक तकनीक नहीं, बल्कि हमारी प्राचीन परंपराओं का हिस्सा है।

मिट्टी की उर्वरता: रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर गोबर और गौमूत्र से बने जीवामृत और बीजामृत का उपयोग मिट्टी के सूक्ष्म जीवों को पुनर्जीवित करता है, जिससे भूमि लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है।

10% का संकल्प: श्री शुक्ल ने किसानों से अपील की कि वे अपनी कुल कृषि भूमि के कम से कम 10 प्रतिशत हिस्से में प्राकृतिक तरीके से फसल उगाएं। इससे परिवार को स्वस्थ और रसायन मुक्त भोजन प्राप्त होगा।

प्रशिक्षण और विकास की योजना

रीवा जिले को प्राकृतिक खेती के मॉडल के रूप में विकसित करने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं:

प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना: बसामन मामा गौवंश विहार में केंद्र शुरू होने के बाद अब हरिहरपुर और हिनौती गौधाम में भी प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाएंगे।

गौशालाओं का नया स्वरूप: गौशालाओं को अब केवल संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि प्राकृतिक खाद और कीटनाशक बनाने वाले ‘आर्थिक केंद्रों’ के रूप में देखा जा रहा है।

कृषि पर्यटन: किसानों को हरिहरपुर फार्म हाउस का भ्रमण कराया जाएगा ताकि वे प्रत्यक्ष रूप से प्राकृतिक खेती की सफलता देख सकें।

हरिहरपुर फार्म हाउस का निरीक्षण

निरीक्षण के दौरान उप मुख्यमंत्री ने स्वयं के खेत में उगाई गई फसलों का जायजा लिया। यहाँ बीजामृत के प्रयोग से गेहूँ की बुवाई की गई है, साथ ही जैविक खाद की मदद से पालक, मेथी, धनिया, बथुआ, शलजम और गाजर जैसी सब्जियां उगाई जा रही हैं। उन्होंने जल संरक्षण और रसायनों के शून्य उपयोग की प्रक्रिया को विस्तार से समझा।

इस अवसर पर गौसंवर्धन बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष श्री राजेश पाण्डेय और डॉ. राजेश मिश्रा सहित अन्य विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।

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