चना उपार्जन में नया कीर्तिमान, लक्ष्य के करीब पहुँचा प्रशासन

धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत चने की खरीदी ने जबरदस्त गति पकड़ ली है। प्रदेश में सबसे अधिक चना उत्पादन करने वाले इस जिले में अब तक 76 हजार क्विंटल चने की खरीदी की जा चुकी है। उपार्जन केंद्रों पर किसानों का उत्साह देखते ही बन रहा है और प्रशासन शेष 24 हजार क्विंटल के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मुस्तैद है।
क्या है PM-AASHA योजना?
वर्ष 2018 में शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य दलहन और तिलहन उत्पादक किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाना है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाकर लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना।
आय की सुरक्षा: किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाना।
बाजार नियंत्रण: यह न केवल किसानों को लाभ पहुँचाती है, बल्कि बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को भी संतुलित रखती है।
धमतरी का सफल ‘प्रबंधन मॉडल’
धमतरी जिला अपनी पारदर्शी कार्यप्रणाली के कारण प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहाँ की सफलता के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
त्वरित भुगतान (DBT): प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से किसानों के खातों में सीधे और जल्दी पैसा पहुँच रहा है।
सुगम पंजीकरण: किसानों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को अत्यंत सरल और पारदर्शी बनाया गया है।
प्रशासनिक सतर्कता: केंद्रों पर भीड़ को देखते हुए कलेक्टर ने नोडल अधिकारियों की संख्या बढ़ा दी है ताकि तौल और कागजी कार्रवाई में देरी न हो।
बेहतर परिवहन: उपार्जित चने को केंद्रों से गोदामों तक पहुँचाने के लिए अतिरिक्त वाहनों की व्यवस्था की गई है, जिससे केंद्रों पर जगह की कमी न हो।
किसानों में बढ़ा दलहन के प्रति रुझान
उपार्जन केंद्रों पर आ रहे किसानों ने व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया है। उनका मानना है कि रबी फसल की कटाई के तुरंत बाद नकद राशि मिलने से उन्हें अगली फसल की तैयारी और घरेलू खर्चों में बड़ी राहत मिल रही है। यही कारण है कि अब क्षेत्र के किसान पारंपरिक फसलों को छोड़कर दलहन उत्पादन की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं।
प्रशासनिक संदेश: जिला प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने नजदीकी नोडल अधिकारियों के संपर्क में रहें ताकि अंतिम चरण की खरीदी बिना किसी असुविधा के पूरी हो सके। प्रशासन का लक्ष्य है कि केंद्र पर आने वाले हर किसान की उपज को प्राथमिकता के आधार पर खरीदा जाए।








