पाक-अफगान शांति वार्ता विफल : डूरंड लाइन और टीटीपी के मुद्दे पर चीन में ठन गई रार

बीजिंग (एजेंसी)। चीन की मध्यस्थता में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद को सुलझाने की कोशिशें नाकाम साबित हुई हैं। बीजिंग में छह दिनों तक चली गहन चर्चा के बाद भी दोनों पड़ोसी देश किसी स्थायी युद्धविराम (Ceasefire) पर सहमति नहीं बना पाए। सूत्रों के अनुसार, बैठक में समाधान निकलने के बजाय दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
वार्ता विफल होने के मुख्य कारण
इस उच्चस्तरीय बैठक में कई ऐसे मुद्दे रहे जिन पर दोनों देशों के प्रतिनिधि अपनी जिद पर अड़े रहे:
आतंकवाद की परिभाषा: तालिबान प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान को घेरते हुए ‘आतंकवाद’ की स्पष्ट परिभाषा की मांग की। उन्होंने दोटूक कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा विफलताओं का दोष अफगानिस्तान पर मढ़ना बंद करे।
डूरंड लाइन विवाद: अफगानिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सीमा (डूरंड लाइन) को मान्यता देने से इनकार कर दिया, जो पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है।
टीटीपी (TTP) पर टकराव: पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के आतंकियों को काबुल में शरण मिल रही है। इसके जवाब में अफगान पक्ष ने इसे पाकिस्तान की घरेलू समस्या बताते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
मुत्ताकी का कड़ा रुख
अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने चीनी अधिकारियों की मौजूदगी में सख्त तेवर दिखाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति की पहल पूरी तरह से पाकिस्तान के व्यवहार पर निर्भर करती है। मुत्ताकी ने यह भी आरोप लगाया कि अस्थायी युद्धविराम के बावजूद पाकिस्तानी सेना अफगान क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई कर रही है।
मध्यस्थ देशों की भूमिका
इस शांति प्रक्रिया को पटरी पर लाने के लिए चीन के नेतृत्व में कुल छह देशों का समूह प्रयास कर रहा था:
चीन (मेजबान और मुख्य मध्यस्थ)
तुर्किये (लगातार बीच-बचाव की कोशिश की)
सऊदी अरब (शांति और संयम की अपील की)
संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
कतर
पाकिस्तान
निष्कर्ष: तुर्किये और सऊदी अरब जैसे देशों ने तनाव कम करने के लिए कई सुझाव दिए, लेकिन पाकिस्तान की टीटीपी को खत्म करने की शर्त और अफगानिस्तान का सीमा विवाद पर अड़ियल रुख वार्ता की विफलता का कारण बना। फिलहाल, सीमा पर तनाव कम होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
















