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डेटा सुरक्षा पर सियासी घमासान : राहुल गांधी के दावों को अश्विनी वैष्णव ने बताया बेबुनियाद

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत की डिजिटल संप्रभुता और डेटा सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा भारत के डेटा की सुरक्षा में सेंधमारी और अमेरिकी व्यापार समझौतों में डेटा से समझौते के आरोपों पर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।

सरकार का पक्ष: डेटा संप्रभुता सर्वोपरि

इन आरोपों का खंडन करते हुए केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि भारत का डेटा पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को गंभीर आरोप लगाने से पहले जमीनी हकीकत और कानूनी ढांचे को समझना चाहिए।

मंत्री के जवाब की मुख्य बातें:

कानूनी सुरक्षा: भारत का डेटा ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट’ (DPDP) के सख्त प्रावधानों के तहत सुरक्षित है।

क्षेत्रीय नियम: संवेदनशील क्षेत्रों (Sensitive Sectors) के लिए देश में पहले से ही कड़े और विशिष्ट नियम लागू हैं।

तथ्यों की कमी: वैष्णव ने कहा कि राहुल गांधी के आरोप निराधार हैं और उन्हें तथ्यों की पुष्टि करने के बाद ही बयानबाजी करनी चाहिए।

विवाद की जड़ क्या है?

दरअसल, राहुल गांधी ने हालिया अमेरिका-भारत व्यापार समझौतों के संदर्भ में यह चिंता जताई थी कि भारतीय नागरिकों की जानकारी और डेटा के साथ समझौता किया जा रहा है। हालांकि, सरकार का कहना है कि डेटा संप्रभुता के मामले में कोई भी समझौता नहीं किया गया है और भारत की नीतियां देशहित को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं।

नोट: सरकार ने बार-बार यह दोहराया है कि भारतीयों का डेटा देश की सीमा के भीतर सुरक्षित रखना उनकी प्राथमिकता है और इसमें किसी भी बाहरी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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