मध्यप्रदेश

लंबित भूमि मामलों के त्वरित निपटारे के लिए राजस्व अभियान फिर से शुरू करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल (एजेंसी)। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों और आम नागरिकों के भूमि-संबंधी लंबित प्रकरणों के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए राजस्व महाअभियान को पुनः शुरू करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अभिलेखों में सुधार जैसे मामलों का तेजी से निपटारा करना है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश महाराजा कन्वेंशन सेंटर खजुराहो में राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिए।

6 माह से अधिक लंबित प्रकरणों का शीघ्र निपटारा करने के लिए पीठासीन अधिकारियों से संपर्क करने पर जोर दिया गया।

राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण कार्य शीघ्रता से पूर्ण किया जाए, जिससे नागरिकों को उनकी भूमि का नक्शा और विवरण आसानी से उपलब्ध हो सके।

यह सुविधा अगले दो वर्षों में वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाए, जिससे प्राप्त दस्तावेज प्रामाणिक हों और डुप्लीकेसी रोकी जा सके।

नवीन आवश्यक आबादी भूमि की पहचान करने और नक्शाविहीन ग्रामों के नक्शे बनाने का निर्देश दिया गया।

भू-अर्जन प्रकरणों के संपूर्ण एंड-टू-एंड निपटारे को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया भी बनाई जाए।

राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने बैठक में विभाग की पिछले दो वर्षों की उपलब्धियों और नवाचारों की जानकारी दी, साथ ही आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना भी प्रस्तुत की। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव राजस्व श्री विवेक पोरवाल सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

पिछले दो वर्षों में राजस्व विभाग की प्रमुख उपलब्धियाँ

राजस्व विभाग ने लंबित मामलों के त्वरित समाधान के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं:

राजस्व महाअभियान (2024–25): इसे तीन चरणों में संचालित किया गया, जिसके तहत एक करोड़ से अधिक प्रकरणों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया।

राजस्व न्यायालयों के लिए समर्पित अधिकारी: मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना जिसने 24 जिलों में राजस्व न्यायालयों के लिए समर्पित अधिकारियों की नियुक्ति कर त्वरित और नियमित न्यायिक कार्यवाही सुनिश्चित की।

RCMS का प्रभावी उपयोग: पिछले दो वर्षों में RCMS के माध्यम से 41.68 लाख प्रकरणों में से 94% से अधिक का समय-सीमा में निपटारा किया गया।

जियो-फेंस तकनीक: जियो-फेंस तकनीक का उपयोग कर त्रुटिरहित फसल गिरदावरी सुनिश्चित करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसमें 3.80 करोड़ सर्वे नंबरों में फसल विवरण को फोटो सहित दर्ज किया गया।

स्वामित्व योजना: प्रदेश के 94% कार्य पूरे कर आबादी ग्रामों में 39.63 लाख अधिकार अभिलेख वितरित किए गए।

कॉल सेंटर: 07 अप्रैल 2025 को 7-सीटर कॉल सेंटर स्थापित किया गया, जिससे 6 माह से लंबित प्रकरणों की संख्या 8963 से घटकर मात्र 150 रह गई।

LAMS मॉड्यूल: भू-अर्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए RCMS पोर्टल पर LAMS मॉड्यूल विकसित किया गया।

बुनियादी ढाँचा: राजस्व प्रशासन को मजबूत करने के लिए 1974 करोड़ की लागत से 438 कार्यालय भवनों को मंजूरी मिली, जिनमें से 324 का निर्माण पूरा हो चुका है।

आपदा राहत: प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए वर्ष 2024–25 में 871 करोड़ 37 लाख और 2025–26 में अब तक 2,068 करोड़ 99 लाख रुपये की राशि व्यय की गई।

मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण: 5281 पटवारी और 136 नायब तहसीलदारों की नियुक्ति की गई, तथा 34,069 (100%) अधिकारियों-कर्मचारियों ने IGOT कर्मयोगी पोर्टल पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।

राजस्व संग्रह में वृद्धि: वर्ष 2024–25 में 1048 करोड़ रुपये से अधिक का संग्रह किया गया, और वर्ष 2025-26 में निर्धारित लक्ष्य से अधिक संग्रहण का लक्ष्य है।

अभिनव प्रयोग और नवाचार

साइबर तहसील: इसे लागू करने से नामांतरण प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस, फेसलेस और क्षेत्राधिकार-मुक्त हो गई है, जिससे औसत निपटान अवधि 50 दिनों से घटकर 22 दिन हो गई। साइबर तहसील को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार, नेशनल डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन अवार्ड 2025, DILRMP के घटकों को लागू करने के लिए भूमि सम्मान, LAMS को Skoch Gold जैसे राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं।

भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण: 15 करोड़ पुराने अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित करने का बड़ा अभियान शुरू किया गया है। यह कार्य सितंबर 2025 से 12 जिलों में शुरू हुआ, और अब तक 1.25 करोड़ पेज स्कैन हो चुके हैं। इससे किसान स्वयं अपनी भूमि की सर्च रिपोर्ट जान सकेंगे।

भू-अभिलेख पोर्टल वर्जन 2.0: यह 1 अगस्त 2025 से शुरू हुआ, जिससे नागरिक अपने मोबाइल पर अपनी भूमि का पूरा रिकॉर्ड देख सकते हैं और प्रमाणित प्रतिलिपि भी प्राप्त कर सकते हैं।

आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना

राजस्व विभाग ने अगले तीन वर्षों के लिए निम्नलिखित लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बनाई है:

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP Act) के अनुरूप विभागीय पोर्टल का आधुनिकीकरण करना।

नक्शाविहीन ग्रामों के नक्शे बनाना और भू-अर्जन प्रक्रियाओं को एंड-टू-एंड ऑनलाइन करना।

नवीन आवश्यक आबादी भूमियों की पहचान करना।

विश्वास आधारित डायवर्ज़न प्रक्रिया लागू करना।

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