पूर्वोत्तर में नई शक्ति का उदय : असम के हाईवे पर गरजेंगे राफेल और सुखोई, पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत की सामरिक और सैन्य क्षमता में आज एक ऐतिहासिक विस्तार होने जा रहा है। असम के डिब्रूगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसी हवाई पट्टी (Emergency Landing Facility) का लोकार्पण करेंगे, जो युद्ध और आपातकाल की स्थिति में गेम-चेंजर साबित होगी। प्रधानमंत्री सुबह 10:30 बजे खुद वायुसेना के विशेष विमान से मोरान बाईपास पर बनी इस लैंडिंग स्ट्रिप पर उतरकर इसकी शुरुआत करेंगे।
सामरिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह रनवे?
मोरन बाईपास पर निर्मित यह 4.2 किलोमीटर लंबी पट्टी पूर्वोत्तर भारत की अपनी तरह की पहली सुविधा है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
भारी विमानों की क्षमता: यह रनवे 40 टन वजनी लड़ाकू विमानों (जैसे राफेल और सुखोई) और 74 टन तक के भारी मालवाहक विमानों का भार सहने के लिए डिजाइन किया गया है।
चीन सीमा की निकटता: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब होने के कारण, यह चाबुआ और तेजपुर जैसे प्रमुख एयरबेसों के लिए एक मजबूत बैकअप के रूप में काम करेगा।
आपदा प्रबंधन: सामरिक महत्व के अलावा, यह पट्टी बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान दूरदराज के इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने में भी सहायक होगी।
आसमान में वायुसेना का शक्ति प्रदर्शन
प्रधानमंत्री के आगमन के अवसर पर भारतीय वायुसेना अपनी ताकत का प्रदर्शन करेगी। इस कार्यक्रम में राफेल, सुखोई-30 MKI और स्वदेशी तेजस जैसे लड़ाकू विमानों के साथ-साथ परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर एयर शो में हिस्सा लेंगे। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे मोरान बाईपास क्षेत्र को ‘नो फ्लाई ज़ोन’ में तब्दील कर दिया गया है।
असम को 5,450 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात
दोपहर में प्रधानमंत्री गुवाहाटी के लचित घाट से राज्य के विकास के लिए कई बड़ी योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे।
परियोजना का नाम,मुख्य लाभ
कुमार भास्कर वर्मा सेतु,”3,030 करोड़ की लागत से बना यह 6-लेन पुल गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी के बीच की दूरी को मात्र 7 मिनट में समेट देगा।”
राष्ट्रीय डाटा केंद्र,अमिंगांव में स्थित यह केंद्र पूर्वोत्तर की डिजिटल अवसंरचना को मजबूती प्रदान करेगा।
IIM गुवाहाटी,उच्च शिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्र के युवाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे।
पीएम-ईबस सेवा,”गुवाहाटी समेत 4 शहरों के लिए 225 इलेक्ट्रिक बसें रवाना की जाएंगी, जिससे प्रदूषण कम होगा।”
इन परियोजनाओं के माध्यम से केंद्र सरकार का लक्ष्य पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी, उच्च शिक्षा और डिजिटल इंडिया के विजन को धरातल पर उतारना है।
















