रूस-यूक्रेन युद्ध : घातक ‘ओरेशनिक’ मिसाइल का प्रहार, कीव में भारी तबाही

कीव/मॉस्को (एजेंसी)। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा संघर्ष अब और भी विनाशकारी रूप लेता जा रहा है। हाल ही में रूस ने यूक्रेन पर अपनी अत्याधुनिक ‘ओरेशनिक’ बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया है। इस हमले ने न केवल राजधानी कीव को दहला दिया, बल्कि युद्ध की गंभीरता को भी बढ़ा दिया है।
हमले का विवरण और हताहतों की संख्या
यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, इस ताजा हमले में 4 लोगों की जान चली गई है और 22 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हताहतों में आपातकालीन सेवाओं के कर्मचारी भी शामिल हैं जो राहत कार्य के दौरान चपेट में आए। कीव के कई हिस्सों में इस हमले के कारण बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली और पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है।
गैस भंडारण और बुनियादी ढांचे पर निशाना
रूसी रक्षा मंत्रालय ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे एक ‘प्रतिशोध’ बताया है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
निशाना: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्य निशाना यूक्रेन के लविव क्षेत्र में स्थित एक बड़ा भूमिगत प्राकृतिक गैस भंडारण केंद्र था।
कारण: रूस का दावा है कि यह हमला पुतिन के आवास पर हुए कथित ड्रोन हमले का जवाब है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस दावे पर सवाल उठाए गए हैं।
प्रभाव: लविव के मेयर ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचने की बात स्वीकारी है।
क्या है ‘ओरेशनिक’ मिसाइल की खासियत?
रूस का यह नया हथियार रक्षा विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इसकी तकनीकी क्षमताएं इसे बेहद खतरनाक बनाती हैं:
रफ़्तार,”लगभग 13,000 किलोमीटर प्रति घंटा (मैक-10)।”
प्रहार क्षमता,इसे इंटरसेप्ट (बीच में रोकना) करना लगभग नामुमकिन है।
तकनीक,इसमें मल्टीपल वारहेड्स लगे होते हैं जो एक साथ कई लक्ष्यों को भेद सकते हैं।
क्षमता,यह मिसाइल परमाणु पेलोड ले जाने में भी सक्षम है।
जेलेंस्की की चेतावनी और वर्तमान स्थिति
हमले से कुछ समय पहले ही राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने देश को सचेत किया था कि रूस कड़ाके की ठंड का फायदा उठाकर हमला कर सकता है। उन्होंने अंदेशा जताया था कि खराब मौसम और जमी हुई सड़कों के कारण राहत कार्यों में बाधा आएगी, जो कीव में देखने को भी मिला।
ड्रोन हमलों ने शहर की बहुमंजिला इमारतों को भी निशाना बनाया है, जिससे रिहायशी इलाकों में आग लग गई और संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचा है। इस नई मिसाइल के उपयोग ने पश्चिमी देशों और यूक्रेन के बीच सुरक्षा चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
















