सिंहस्थ 2028 : सांस्कृतिक वैभव और आधुनिक विकास के संगम से बनेगा ‘विकसित मध्यप्रदेश’ : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल (एजेंसी)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने जन्मदिवस के अवसर पर उज्जैन आकाशवाणी केंद्र से प्रदेश की जनता के नाम एक विशेष संदेश साझा किया। इस दौरान उन्होंने आगामी सिंहस्थ-2028 को एक वैश्विक स्तर का भव्य आयोजन बनाने का दृढ़ संकल्प दोहराया। मुख्यमंत्री का यह संबोधन प्रदेश के सभी 17 केंद्रों से प्रसारित हुआ, जिसे एक करोड़ से अधिक लोगों ने सुना।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार के रोडमैप को साझा किया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- सांस्कृतिक विरासत और सुशासन
डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रगति के उस पथ पर है जहाँ परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चल रहे हैं। सम्राट विक्रमादित्य के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राज्य में सुशासन के नए कीर्तिमान स्थापित किए जा रहे हैं।
- जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन
सनातन संस्कृति में नदियों के महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि क्षिप्रा नदी को स्वच्छ और प्रवाहमान बनाने के लिए रिवर फ्रंट विकसित किया जा रहा है। साथ ही, केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल जैसी नदी जोड़ो परियोजनाओं के माध्यम से जल संकट को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए हजारों करोड़ की योजनाओं पर काम जारी है।
- कृषि और किसान कल्याण
वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य आधुनिक सिंचाई सुविधाओं और कृषि यंत्रीकरण के जरिए किसानों की आय में ठोस वृद्धि करना है।
- औद्योगिक क्रांति और युवा स्वरोजगार
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और क्षेत्रीय सम्मेलनों के माध्यम से निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी जैसे क्षेत्रों के विकास से युवाओं को ‘नौकरी खोजने वाला’ नहीं बल्कि ‘नौकरी देने वाला’ (उद्यमी) बनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश शिक्षा नीति (NEP) लागू करने वाला अग्रणी राज्य है, जो छात्रों के लिए वैश्विक अवसर खोल रहा है।
- सामाजिक न्याय और सुरक्षा
जनजातीय कल्याण: ‘अंत्योदय’ के सिद्धांत पर चलते हुए भगोरिया उत्सव को राजकीय पहचान दी गई है और वनोपज के जरिए वनवासियों की आय बढ़ाई जा रही है।
सुरक्षा: राज्य में नक्सलवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई गई है।
महिला सशक्तिकरण: लाड़ली बहनों और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
- भविष्य का शहरी ढांचा और पर्यावरण
प्रदेश के प्रमुख महानगरों जैसे इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर को भविष्य की जरूरतों के अनुसार मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही, चीता प्रोजेक्ट और ईको-टूरिज्म के विस्तार से मध्यप्रदेश प्रकृति संरक्षण के मामले में दुनिया का केंद्र बन रहा है।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि ‘समृद्ध मध्यप्रदेश’ का सपना साझा प्रयासों से ही पूरा होगा। उन्होंने जनता से इस विकास यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान किया ताकि राज्य को वैभवशाली और आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
















