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होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद : ट्रंप ने दी ईरान को अंतिम चेतावनी, मंगलवार रात तक का समय तय

वॉशिंगटन (एजेंसी)। खाड़ी क्षेत्र में जारी गतिरोध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए हमले का संभावित समय स्पष्ट कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की मांग पर अड़े ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो मंगलवार रात 8 बजे (अमेरिकी समयानुसार) सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। भारतीय समय के मुताबिक यह समय बुधवार सुबह लगभग 5:30 बजे होगा।

ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का कड़ा संदेश

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ के जरिए सीधे तौर पर ‘मंगलवार रात 8 बजे’ का जिक्र कर तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ईरान रास्ता खोलने में विफल रहता है, तो अमेरिका उसके बुनियादी ढांचे और ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाने में संकोच नहीं करेगा। ट्रंप की इस चेतावनी ने वैश्विक तेल बाजार और कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।

बुनियादी ढांचे को तबाह करने की धमकी

हालिया बयानों में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अगर ईरान ने जिद नहीं छोड़ी, तो उसके पावर प्लांट, पुल और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचाया जा सकता है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका की सैन्य शक्ति ईरान की अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह पंगु बनाने में सक्षम है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे अब भी एक समझौते की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन यह पूरी तरह ईरान के रुख पर निर्भर करेगा।

अल्टीमेटम और बढ़ती समय सीमा

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने समय सीमा तय की हो। इससे पहले भी 48 घंटे के अल्टीमेटम दिए गए थे, जिन्हें बातचीत की गुंजाइश देखते हुए बढ़ाया गया था। अब 8 अप्रैल की समय सीमा को अंतिम माना जा रहा है। ट्रंप का यह भी दावा है कि ईरान की जनता अपनी मौजूदा सरकार की नीतियों से त्रस्त है, जिसका फायदा अमेरिका को मिल सकता है।

क्षेत्र में युद्ध के बादल

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह तनाव न केवल द्विपक्षीय मुद्दा है, बल्कि इससे वैश्विक व्यापारिक मार्ग भी प्रभावित हो रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। यदि यहां सैन्य टकराव होता है, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ना तय है। फिलहाल सबकी निगाहें मंगलवार की रात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति सफल होगी या क्षेत्र युद्ध की आग में झुलसेगा।

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