देश-विदेश

रणनीतिक संवाद : नाटो महासचिव और डोनाल्ड ट्रंप की आगामी मुलाकात पर टिकी दुनिया की नजरें

वाशिंगटन (एजेंसी)। उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के नवनियुक्त महासचिव मार्क रुट्टे अगले सप्ताह अमेरिका की महत्वपूर्ण यात्रा पर जा रहे हैं। 8 से 12 अप्रैल के बीच होने वाले इस दौरे का मुख्य केंद्र राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता होगी। गठबंधन के भविष्य और वैश्विक सुरक्षा को लेकर यह मुलाकात अत्यंत निर्णायक मानी जा रही है।

यात्रा का प्रस्तावित कार्यक्रम

नाटो प्रवक्ता द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, रुट्टे का कार्यक्रम काफी व्यस्त रहने वाला है:

8 अप्रैल: राष्ट्रपति ट्रंप, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ उच्च स्तरीय बैठक।

9 अप्रैल: ‘रोनाल्ड रीगन प्रेसिडेंशियल फाउंडेशन एंड इंस्टीट्यूट’ में सार्वजनिक संबोधन और रणनीतिक चर्चा।

बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका का रुख

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में काफी खिंचाव देखा जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल के दिनों में यूरोपीय देशों की भूमिका पर कड़े सवाल उठाए हैं। उनके विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

रणनीतिक समर्थन की कमी: ट्रंप का आरोप है कि नाटो सहयोगी अमेरिकी हितों, विशेषकर ईरान से जुड़े संघर्षों में पर्याप्त सहयोग नहीं दे रहे हैं।

सैन्य पहुंच पर पाबंदी: यूरोप में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक पहुंच को लेकर कुछ देशों के रवैये से ट्रंप असंतुष्ट हैं।

समुद्री सुरक्षा: होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा में नेतृत्व न लेने के लिए उन्होंने सहयोगियों की आलोचना की है।

“ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि सहयोगी देश अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभाते, तो अमेरिका 77 साल पुराने इस गठबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं की समीक्षा कर सकता है।”

मार्क रुट्टे: ‘ट्रंप विस्परर’ की भूमिका में

नीदरलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री मार्क रुट्टे को अंतरराष्ट्रीय हलकों में “ट्रंप विस्परर” के रूप में जाना जाता है। उनके पास ट्रंप के साथ जटिल मुद्दों पर भी सकारात्मक संवाद बनाए रखने का अनुभव है।

रुट्टे का मानना है कि ट्रंप द्वारा डाला गया दबाव वास्तव में गठबंधन के लिए फायदेमंद रहा है, क्योंकि इसने यूरोपीय देशों को अपने रक्षा बजट में वृद्धि करने के लिए मजबूर किया है। आगामी बैठक में गठबंधन की एकजुटता, रक्षा व्यय के लक्ष्यों और अस्थिर वैश्विक माहौल में आपसी समन्वय को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा।

पूरी दुनिया इस बैठक के परिणामों की प्रतीक्षा कर रही है, क्योंकि यह तय करेगी कि बदलती विश्व व्यवस्था में नाटो की प्रासंगिकता और शक्ति किस दिशा में जाएगी।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button