मध्यप्रदेश

सनातन संस्कृति के ध्वजवाहक स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती : भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणापुंज

भोपाल (एजेंसी)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को भारतीय संस्कृति और राष्ट्र निर्माण का एक अनन्य प्रतीक बताया है। सिवनी में स्वामी जी की जन्मस्थली पर नवनिर्मित ‘दिव्य स्तंभ’ के लोकार्पण के अवसर पर मुख्यमंत्री ने जबलपुर एयरपोर्ट से वर्चुअल माध्यम से अपनी बात रखी।

राष्ट्र निर्माण और आध्यात्मिक चेतना का संगम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का संपूर्ण जीवन सनातन परंपराओं के संरक्षण और देश के प्रति उनके अटूट समर्पण की एक जीवंत गाथा है। उन्होंने कहा कि:

प्रेरणा का केंद्र: सिवनी में स्थापित यह दिव्य स्तंभ केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान और संस्कारों का मार्गदर्शक बनेगा।

सामूहिक उत्तरदायित्व: यह हम सभी का कर्तव्य है कि हम स्वामी जी के आदर्शों और आध्यात्मिक मूल्यों को न केवल अपने जीवन में उतारें, बल्कि उन्हें समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाएं।

सुशासन का आधार: प्रदेश सरकार सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों से प्रेरणा लेकर ही जन-कल्याण और सुशासन के पथ पर अग्रसर है।

सांस्कृतिक पुनरुत्थान की दिशा में बढ़ते कदम

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े सभी महत्वपूर्ण स्थलों को ‘तीर्थ स्थल’ के रूप में भव्य रूप से विकसित किया जा रहा है, ताकि राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को अक्षुण्ण रखा जा सके।

आध्यात्मिक योगदान का स्मरण

कार्यक्रम के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने भी आदि शंकराचार्य के महान जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा धर्म की रक्षा और राष्ट्र के प्रति निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका को याद करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

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