असम के ‘सिल्क विलेज’ पहुँचे सीएम डॉ. यादव : पारंपरिक बुनाई और मूगा रेशम के कौशल को सराहा

भोपाल (एजेंसी)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने असम प्रवास के दौरान गुवाहाटी के पास स्थित सुआलकुची गाँव का दौरा किया। अपनी ऐतिहासिक महत्ता और रेशम उत्पादन के लिए प्रसिद्ध इस स्थान पर मुख्यमंत्री ने स्थानीय शिल्पकारों से मुलाकात की और रेशम तैयार करने की सदियों पुरानी पद्धति को करीब से समझा।
बुनकरों की कलाकारी और संवाद
भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने सुआलकुची की कार्यशालाओं में जाकर हस्तशिल्प की बारीकियों का अवलोकन किया। उन्होंने देखा कि किस प्रकार यहाँ के बुनकर आज भी पारंपरिक करघों का उपयोग कर कलाकृतियाँ गढ़ रहे हैं। बुनकरों से बातचीत करते हुए डॉ. यादव ने उनके कौशल की प्रशंसा की और कहा कि यह शिल्प न केवल कला का एक अद्भुत स्वरूप है, बल्कि यह स्थानीय लोगों की आजीविका का एक मजबूत आधार भी है।
‘पूर्व का मैनचेस्टर’ और विशिष्ट रेशम
सुआलकुची को अपनी अनूठी बुनाई शैली के कारण ‘पूर्व का मैनचेस्टर’ के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ मुख्यमंत्री ने असम की पहचान माने जाने वाले तीन प्रमुख रेशमों के बारे में जानकारी ली:
मूगा: विशेष सुनहरा रेशम।
पैट: हाथीदांत जैसी चमक वाला सफ़ेद रेशम।
एरी: हल्के बादामी रंग का रेशम।
संग्रहालय और हस्तशिल्प का अनुभव
मुख्यमंत्री ने ‘आमार सुआलकुची’ संग्रहालय और ‘बस्त्रा उद्यान’ का भी भ्रमण किया। यहाँ उन्होंने हाथकरघा उद्योग के क्रमिक विकास और मेखला चादर, साड़ी व गमछा जैसे पारंपरिक वस्त्रों के निर्माण की प्रक्रिया को देखा।
डॉ. यादव के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य अन्य राज्यों के सफल कुटीर उद्योगों और पारंपरिक कलाओं के मॉडल को समझना है, ताकि उनके अनुभवों का लाभ उठाकर मध्य प्रदेश के शिल्प क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
















