सांस्कृतिक पुनरुत्थान : सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर ₹1.01 करोड़ के अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार की घोषणा

उज्जैन (एजेंसी)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘विक्रमोत्सव-2026’ का भव्य शुभारंभ करते हुए भारतीय संस्कृति को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। उज्जैन की पावन धरा से मुख्यमंत्री ने सम्राट विक्रमादित्य की स्मृति में देश के सबसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय सम्मान की स्थापना का ऐलान किया।
प्रमुख घोषणाएं और पुरस्कार
सम्राट विक्रमादित्य के न्यायप्रिय शासन और गौरवशाली परंपरा को जीवित रखने के लिए राज्य सरकार ने निम्नलिखित पुरस्कारों की रूपरेखा तैयार की है:
विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय अलंकरण: ₹1 करोड़ 1 लाख की राशि वाला यह सम्मान विश्व स्तर पर भारत की सांस्कृतिक साख बढ़ाएगा।
राष्ट्रीय सम्मान: ₹21 लाख की राशि का एक राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार।
राज्य स्तरीय सम्मान: ₹5-5 लाख के तीन विशेष पुरस्कारों की स्थापना।
विरासत से विकास की ओर: विक्रमोत्सव और सिंहस्थ-2028
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन केवल एक शहर नहीं, बल्कि ज्ञान और विज्ञान का केंद्र रहा है। विक्रमोत्सव अब एक वैश्विक ब्रांड बन चुका है, जिसे ‘एशिया के सबसे बड़े धार्मिक उत्सव’ और ‘लॉन्गस्टैंडिंग आईपी ऑफ द ईयर’ जैसे अंतर्राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं।
सिंहस्थ की तैयारी:
2028 में होने वाले आगामी सिंहस्थ को देखते हुए सरकार अधोसंरचना पर विशेष ध्यान दे रही है:
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 4-लेन और 6-लेन सड़कों का निर्माण।
क्षिप्रा नदी के किनारे 30 किलोमीटर लंबे नए घाटों का विकास।
नदी को स्वच्छ और अविरल बनाने के लिए विशेष कार्ययोजना।
सांस्कृतिक और वैज्ञानिक चेतना
डॉ. यादव ने ज़ोर दिया कि भारत को ‘ग्रीनविच’ के बजाय अपनी वैदिक काल गणना और विक्रम संवत पर गर्व करना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि त्योहारों पर केवल ‘शुभकामनाएं’ नहीं, बल्कि ‘मंगलकामनाएं’ साझा करें।
“सम्राट विक्रमादित्य का शासन काल ज्ञान, विज्ञान और सुशासन का स्वर्ण युग था। हमारा प्रयास उसी ‘रामराज्य’ की परिकल्पना को साकार करना है।” — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री
भक्तिमय सांस्कृतिक संध्या
139 दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव का आगाज ‘नमो नमो शंकरा’ की गूँज के साथ हुआ। संगीतकार प्रीतम और उनके बैंड ने ‘देवा देवा’ और ‘शिवाय’ जैसे गीतों से समां बांध दिया। अभिजीत सावंत और मीनल जैन जैसे प्रसिद्ध गायकों ने शिव भजनों की प्रस्तुति देकर पूरे वातावरण को शिवमय कर दिया।
आयोजन का विवरण:
अवधि: 139 दिन।
गतिविधियाँ: 41 से अधिक सांस्कृतिक, व्यापारिक और अकादमिक कार्यक्रम।
मुख्य आकर्षण: विक्रम व्यापार मेला, कलश यात्रा और शास्त्रीय संगीत सभाएं।
















