अजित पवार के बाद NCP का भविष्य : क्या बिखर जाएगा कुनबा या ये 4 दिग्गज बचाएंगे नैया?

मुंबई (एजेंसी)। महाराष्ट्र की राजनीति में एक युग का अंत और अनिश्चितता का नया दौर शुरू हो गया है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन ने राज्य के सियासी गलियारों में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी विरासत और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की कमान किसके हाथों में होगी?
अजित पवार न केवल सरकार का अहम हिस्सा थे, बल्कि अपनी पार्टी के निर्विवाद सेनापति भी थे। उनके जाने के बाद राजनीतिक पंडित दो संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं। पहली यह कि क्या अजित पवार का गुट वापस शरद पवार की छत्रछाया में लौट जाएगा? और दूसरी यह कि क्या यह गुट अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखते हुए ‘महायुति’ गठबंधन के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा?
माना जा रहा है कि पार्टी की चाबी अंततः पवार परिवार (सुनेत्रा पवार या पार्थ पवार) के पास ही रहेगी, लेकिन प्रशासनिक और सांगठनिक स्तर पर चार ऐसे नाम हैं जो संकट के इस समय में पार्टी को दिशा दे सकते हैं:
नेतृत्व की रेस में ये 4 बड़े नाम:
- प्रफुल्ल पटेल: अनुभव और दिल्ली तक पहुंच अजित पवार के सबसे भरोसेमंद साथियों में गिने जाने वाले प्रफुल्ल पटेल इस समय सबसे मजबूत दावेदार हैं। उनके पास केंद्र और राज्य, दोनों जगह काम करने का लंबा अनुभव है। यूपीए सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्रालय संभालने वाले पटेल की राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष होने के नाते, वह दिल्ली और मुंबई के बीच एक सेतु का काम कर सकते हैं।
- छगन भुजबल: ओबीसी राजनीति का बड़ा चेहरा अगर पार्टी को महाराष्ट्र की जमीनी राजनीति और जातीय समीकरणों को साधना है, तो छगन भुजबल से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। लगभग 40 साल का लंबा राजनीतिक सफर तय करने वाले भुजबल ओबीसी समाज की कद्दावर आवाज हैं। दो बार डिप्टी सीएम रह चुके भुजबल की प्रशासनिक पकड़ और आक्रामक शैली पार्टी को बिखरने से रोकने में मददगार साबित हो सकती है।
- सुनील तटकरे: संगठन के चाणक्य सुनील तटकरे वर्तमान में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं और संगठन की रग-रग से वाकिफ हैं। कोंकण क्षेत्र में उनका खासा प्रभाव है और वह लोकसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व भी कर रहे हैं। तटकरे को वित्त और जल संसाधन जैसे विभागों का गहरा ज्ञान है। संगठन को एकजुट रखने और चुनाव रणनीति बनाने में उनकी भूमिका निर्णायक हो सकती है।
- धनंजय मुंडे: युवा जोश और मराठवाड़ा की ताकत मराठवाड़ा क्षेत्र के प्रभावशाली नेता धनंजय मुंडे भी इस रेस में शामिल हैं। वह न केवल एक कुशल वक्ता हैं, बल्कि युवाओं के बीच भी लोकप्रिय हैं। भाजपा नेतृत्व के साथ उनके पुराने और मधुर संबंध गठबंधन को सुचारू रूप से चलाने में ‘पावर ब्रिज’ का काम कर सकते हैं।
निष्कर्ष: NCP के इन 41 विधायकों का भविष्य अब इस बात पर निर्भर करेगा कि पार्टी भावनाओं और व्यावहारिक राजनीति के बीच कैसे संतुलन बनाती है। उपमुख्यमंत्री का पद केवल एक ओहदा नहीं, बल्कि 2029 के विधानसभा चुनावों की नींव भी है।
















