मध्यप्रदेश

मप्र के हर शहर में गूँजेगा गीता का संदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव की नई सांस्कृतिक पहल

भोपाल (एजेंसी)। मध्य प्रदेश सरकार राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक स्वरूप देने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि इंदौर और जबलपुर के सफल मॉडल को अपनाते हुए अब प्रदेश के सभी 413 नगरीय निकायों में ‘गीता भवन’ स्थापित किए जाएंगे।

परियोजना का मुख्य विजन और उद्देश्य

मुख्यमंत्री के अनुसार, इन केंद्रों का निर्माण केवल भवनों के रूप में नहीं, बल्कि एक दार्शनिक और बौद्धिक वातावरण तैयार करने के लिए किया जा रहा है। इसके मुख्य लक्ष्य इस प्रकार हैं:

युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन: नई पीढ़ी को श्रीमद्भगवद्गीता के ‘निष्काम कर्म’ सिद्धांत और भारतीय जीवन मूल्यों से परिचित कराना।

अनुसंधान को बढ़ावा: शोधार्थियों (researchers) के लिए उच्च स्तरीय संसाधन और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना।

बौद्धिक केंद्र: शहरों में कला, दर्शन और साहित्य पर चर्चा के लिए एक आधुनिक मंच तैयार करना।

बजट और वर्तमान प्रगति

इस 5-वर्षीय योजना को गति देने के लिए सरकार ने ठोस वित्तीय और प्रशासनिक तैयारी कर ली है:

वित्तीय प्रावधान: वर्ष 2026-27 के बजट में इस परियोजना के लिए 60 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स: रीवा, छिंदवाड़ा, कटनी और खंडवा जैसे शहरों में मौजूदा बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए तकनीकी मंजूरी मिल चुकी है।

भूमि आवंटन: लगभग 100 निकायों में जमीन चिन्हित की जा चुकी है, जबकि शेष 313 निकायों में जिला कलेक्टरों के माध्यम से भूमि आवंटन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

गीता भवन की आधुनिक सुविधाएँ

ये भवन पारंपरिक केंद्रों से अलग, आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे। इनमें शामिल होंगे:

अत्याधुनिक ऑडिटोरियम: सांस्कृतिक कार्यक्रमों और बड़े सेमिनारों के लिए।

डिजिटल लाइब्रेरी: ज्ञानार्जन के लिए समृद्ध पुस्तकालय और हाई-टेक ई-लाइब्रेरी की सुविधा।

सार्वजनिक सुविधाएँ: आगंतुकों के लिए कैफेटेरिया और विशेष पुस्तक विक्रय केंद्र, जहाँ आध्यात्मिक साहित्य उपलब्ध होगा।

विशेष तथ्य: रीवा में इस प्रोजेक्ट के लिए सर्वाधिक 5 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जो इसे एक प्रमुख क्षेत्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

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