2026 का सियासी रण : पांच राज्यों के चुनावी नतीजे तय करेंगे गठबंधन की ताकत और भविष्य

नई दिल्ली (एजेंसी)। नया साल भारतीय राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होने वाला है। इस साल के शुरुआती महीनों में होने वाले चार राज्यों—पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम—और केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी के विधानसभा चुनाव केवल स्थानीय सरकारें ही नहीं चुनेंगे, बल्कि देश की आगामी राजनीतिक दिशा भी निर्धारित करेंगे। यह चुनाव विशेष रूप से सत्ताधारी एनडीए (NDA) और विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के लिए साख की लड़ाई है।
दिग्गजों की साख दांव पर
इन चुनावों में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दोनों ही दलों के सामने अपने अस्तित्व और किलों को बचाने की बड़ी चुनौती है:
टीएमसी (TMC): बंगाल में ममता बनर्जी के सामने जीत का चौका लगाने की चुनौती है।
डीएमके (DMK): तमिलनाडु में अपनी पकड़ को बरकरार रखना चाहेगी।
भाजपा (BJP): असम में जीत की हैट्रिक और पुदुचेरी में सत्ता बचाने के साथ-साथ दक्षिण भारत (केरल, तमिलनाडु) में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है।
विपक्षी एकता की अग्निपरीक्षा
वर्ष 2026 विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के लिए सबसे कठिन परीक्षा का समय है। गठबंधन के साथी दल ही कई राज्यों में एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में होंगे:
केरल: यहाँ मुख्य मुकाबला कांग्रेस नीत यूडीएफ (UDF) और वामपंथी एलडीएफ (LDF) के बीच है, जो राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी हैं।
बंगाल: यहाँ भी टीएमसी, कांग्रेस और वाम दलों के बीच गठबंधन की संभावनाएं धूमिल नजर आ रही हैं, जिससे त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार हैं।
तमिलनाडु और पुदुचेरी: केवल इन दो क्षेत्रों में ही विपक्षी एकजुटता के बने रहने की उम्मीद है।
बंगाल में समीकरणों का बदलता खेल
पूरे देश की निगाहें पश्चिम बंगाल पर टिकी हैं। भाजपा जहाँ पिछले अधूरे सपने को पूरा कर सत्ता पाना चाहती है, वहीं टीएमसी को अपने वोट बैंक में सेंधमारी का डर सता रहा है। कुछ पूर्व विधायकों के बागी रुख और एआईएमआईएम (AIMIM) जैसे दलों के साथ संभावित गठजोड़ ने मुस्लिम मतदाताओं के बिखराव की चिंता बढ़ा दी है।
वामपंथ का ‘अंतिम किला’ खतरे में?
केरल वामपंथी दलों के लिए देश का आखिरी बड़ा आधार है। त्रिपुरा और बंगाल खोने के बाद सीपीआई (एम) के लिए केरल की सत्ता बचाना अस्तित्व की लड़ाई है। हालांकि, कांग्रेस यहाँ पूरी ताकत झोंक रही है, जिससे एलडीएफ के लिए दोबारा इतिहास रचना आसान नहीं होगा।
क्या होगा इन नतीजों का असर?
भाजपा की मजबूती: यदि भाजपा असम, पुदुचेरी के साथ बंगाल में बेहतर प्रदर्शन करती है, तो केंद्र में उसकी पकड़ और मजबूत होगी।
कांग्रेस का पुनरुद्धार: केरल की जीत कांग्रेस के लिए ‘बूस्टर’ की तरह होगी, जिससे तेलंगाना और कर्नाटक के बाद उसके पास एक और मजबूत राज्य होगा।
ममता का बढ़ता कद: बंगाल में चौथी बार जीत दर्ज करने पर ममता बनर्जी विपक्षी खेमे में निर्विवाद रूप से सबसे शक्तिशाली नेता के रूप में उभरेंगी।
















