अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल : ट्रंप ने दिए बंदरगाहों की नाकेबंदी के आदेश, कच्चे तेल में 8% का उछाल

नई दिल्ली (एजेंसी)। वैश्विक राजनीति में एक बार फिर अस्थिरता का माहौल गरमा गया है। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही महत्वपूर्ण शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई। 21 घंटों की लंबी जद्दोजहद के बाद भी दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। वार्ता विफल होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त रुख अपनाते हुए ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी करने का फैसला किया है।
US सेंट्रल कमांड का एक्शन और नाकेबंदी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक घोषणा की है कि वह ईरानी तटों और बंदरगाहों की पूर्ण नाकेबंदी (Blockade) शुरू कर रहा है। इस आदेश के तहत ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले या वहां से आने वाले जहाजों को रोका जाएगा। हालांकि, ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले उन जहाजों को छूट दी जाएगी जो गैर-ईरानी गंतव्यों की यात्रा कर रहे हैं। इस कड़े कदम के बाद खबरें यह भी आ रही हैं कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर दोबारा हवाई हमले शुरू करने की योजना बना रहा है।
बाजार में खलबली: $100 के पार पहुंचा कच्चा तेल
शांति वार्ता टूटने की खबर का असर वैश्विक तेल बाजार पर तत्काल और विनाशकारी दिखा। पिछले दो हफ्तों के संघर्ष विराम (Ceasefire) के दौरान तेल की गिरती कीमतों में अचानक ‘आग’ लग गई है:
WTI क्रूड ऑयल: सोमवार को इसमें 8% से अधिक की भारी बढ़त देखी गई और यह $104.24 प्रति बैरल पर पहुंच गया।
ब्रेंट क्रूड: अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी 7% उछलकर $102.29 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया।
प्राकृतिक गैस: इसकी कीमतों में भी 2% की वृद्धि दर्ज की गई है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व और संकट
पूरी दुनिया की नजरें अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है, क्योंकि दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% (पांचवां हिस्सा) इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, कुवैत और यूएई जैसे बड़े निर्यातक इसी मार्ग पर निर्भर हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव युद्ध में तब्दील होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $120 के स्तर को भी पार कर सकती हैं। इससे न केवल परिवहन लागत बढ़ेगी, बल्कि पूरी दुनिया में महंगाई का एक नया दौर शुरू होने का जोखिम पैदा हो जाएगा।
असफलता: इस्लामाबाद वार्ता बेनतीजा रही।
जवाबी कार्रवाई: ट्रंप ने ईरानी पोर्ट्स की नाकेबंदी शुरू की।
बाजार: कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल, वैश्विक महंगाई का खतरा।
















