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पश्चिम एशिया संकट : ईरान ने रखीं शांति की शर्तें, भारतीय जहाजों को सुरक्षा का भरोसा

नई दिल्ली (एजेंसी)। मुंबई में ईरान के महावाणिज्यदूत सईद रेजा मोसायेब मोटलाघ ने हाल ही में पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर ईरान का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने बातचीत की मेज पर आने से पहले ईरान की ओर से कुछ कड़े नियम और शर्तें रखी हैं।

शांति वार्ता के लिए ईरान की प्रमुख शर्तें

मोटलाघ के अनुसार, ईरान कूटनीति के खिलाफ नहीं है, लेकिन किसी भी समझौते से पहले निम्नलिखित बिंदुओं पर अमल होना अनिवार्य है:

युद्ध की क्षतिपूर्ति: संघर्ष के दौरान हुए सभी नुकसानों और युद्ध की भारी क्षति की भरपाई की जानी चाहिए।

विश्वसनीय गारंटी: भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस आश्वासन की आवश्यकता है।

तीसरे पक्ष की भूमिका: ईरान का मानना है कि यह गारंटी अमेरिका के बजाय किसी अन्य भरोसेमंद देश की ओर से आनी चाहिए।

भारतीय जहाजों और होर्मुज जलडमरूमध्य पर स्पष्टीकरण

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकियों पर सफाई देते हुए महावाणिज्यदूत ने कहा कि ईरान की कार्रवाई केवल ‘शत्रुतापूर्ण’ देशों के खिलाफ है। भारत जैसे देशों के लिए उन्होंने सकारात्मक रुख अपनाया:

“भारत जैसे मित्र राष्ट्रों का इस संघर्ष से कोई लेना-देना नहीं है। हम भारत और दुनिया के अन्य शांतिप्रिय देशों की सहायता के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारतीय जहाजों के पारगमन (Transit) पर कोई पाबंदी नहीं है और उन्हें सुरक्षित मार्ग दिया जाना जारी रहेगा।”

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील

मोटलाघ ने वैश्विक शक्तियों और संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि वे हमलावर पक्ष को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में लाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल ईरान की लड़ाई नहीं है, बल्कि एकतरफा सैन्य कार्रवाइयों के खिलाफ वैश्विक एकजुटता का मामला है।

दूसरी ओर: ट्रंप का कड़ा रुख

इस कूटनीतिक हलचल के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत हो गया है। ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा कि उन्होंने ईरान के सैन्य और नौसैनिक ढांचे को भारी चोट पहुंचाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान खतरों को समाप्त करने के इस अवसर का लाभ उठाएगा, ताकि विश्व सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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