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पश्चिम एशिया संकट : पीएम मोदी ने सऊदी अरब और बहरीन के शीर्ष नेताओं से की बात, क्षेत्र की सुरक्षा पर जताई चिंता

नई दिल्ली (एजेंसी)। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ते सैन्य तनाव और संघर्ष के बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। क्षेत्र में बिगड़ते हालातों को देखते हुए पीएम मोदी ने बहरीन के सुल्तान हमाद बिन ईसा अल खलीफा और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस व प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान के साथ फोन पर विस्तृत चर्चा की।

प्रधानमंत्री ने हाल के दिनों में खाड़ी देशों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। इस बातचीत के दौरान मुख्य रूप से दो विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया:

क्षेत्रीय शांति: भारत ने युद्ध की स्थिति को समाप्त करने और शांति बहाली के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारतीय समुदाय की सुरक्षा: इन देशों में रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा और कुशलक्षेम को लेकर भी चर्चा हुई, जिस पर अरब नेताओं ने सकारात्मक आश्वासन दिया।

कूटनीतिक प्रयासों का सिलसिला

यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी इस संकट को लेकर सक्रिय हुए हैं। पिछले कुछ दिनों में उन्होंने कई वैश्विक नेताओं से संवाद किया है:

इजरायल: रविवार को प्रधानमंत्री ने इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से बात कर हिंसा को तुरंत रोकने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की थी।

यूएई: संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से चर्चा के दौरान मोदी ने यूएई पर हुए हमलों के प्रति एकजुटता व्यक्त की और वहां रहने वाले प्रवासियों का ख्याल रखने के लिए उनका आभार जताया।

“भारत इस कठिन समय में अपने सहयोगियों के साथ खड़ा है। हमारा लक्ष्य क्षेत्र में तनाव कम करना और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

सुरक्षा समिति (CCS) की महत्वपूर्ण बैठक
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सीधे टकराव और ईरान के सर्वोच्च नेता की मृत्यु के बाद उपजे हालातों की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई।

अवधि: लगभग 3 घंटे।

प्रतिभागी: गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।

एजेंडा: युद्ध का भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक हितों पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण करना।

वर्तमान में स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है, और भारत का रुख स्पष्ट है—तनाव को कम करना और मानवीय हितों की रक्षा करना।

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