देवी अहिल्याबाई के आदर्शों को आत्मसात कर विकसित भारत के संकल्प में जुटें युवा : राज्यपाल मंगुभाई पटेल

इंदौर (एजेंसी)। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए मध्य प्रदेश के राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने युवा पीढ़ी से लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के जीवन मूल्यों को अपनाने और राष्ट्र सेवा को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।
लोकमाता का जीवन: शुचिता और सेवा का संगम
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि देवी अहिल्याबाई होल्कर न केवल एक कुशल शासक थीं, बल्कि राजनीतिक पवित्रता और महिला सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल भी थीं। उन्होंने बताया कि:
ऐतिहासिक उदारता: लोकमाता ने जूनागढ़ के 60 परिवारों को इंदौर में शरण देकर समाज सेवा का अनुपम उदाहरण पेश किया था।
अमर विरासत: लगभग 300 वर्षों के बाद भी उनके कार्य और विचार आज के युवाओं के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं।
राष्ट्र निर्माण: विद्यार्थियों को उनकी निस्वार्थ सेवा भावना से सीख लेते हुए देश के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।
नारी शक्ति का बढ़ता वर्चस्व
दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल ने शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि और मेधावी छात्रों को पदक प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उपाधि प्राप्त करने वालों में बेटियों की संख्या बेटों से अधिक है। उन्होंने इसे ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान की एक बड़ी उपलब्धि बताया।
“डिग्री केवल कागज़ का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रति आपकी नैतिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। शिक्षित होने का अर्थ है वंचितों और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील होना।”
विकसित भारत 2047 का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के तीव्र विकास का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने विश्वास जताया कि वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने में इस विश्वविद्यालय के छात्र अपनी अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल एनीमिया के विरुद्ध चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों की भी विशेष सराहना की।
रामायण और जीवन मूल्यों की शिक्षा
विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करते हुए श्री पटेल ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जीवन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा:
परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन हों, सत्य और ईमानदारी का मार्ग कभी न छोड़ें।
माता-पिता और गुरुओं के प्रति कर्तव्यनिष्ठा का पालन करें।
रामायण का हर पात्र हमें धैर्य और मर्यादा में रहकर लक्ष्य प्राप्ति की सीख देता है।
समारोह के अन्य मुख्य बिंदु
सांसद श्री शंकर लालवानी: उन्होंने छात्रों को विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास: उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने और उसे पाने के लिए कठोर परिश्रम करने की सलाह दी।
कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई: उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता और नवाचार के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी साझा की।
इस भव्य समारोह में विश्वविद्यालय के कुलसचिव, प्रोफेसर, छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
















