विधायक भावना बोहरा के प्रयास से 115 आदिवासियों की ‘घर वापसी’

कवर्धा। पंडरिया विधानसभा के वनांचल क्षेत्रों के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब स्थानीय विधायक भावना बोहरा के प्रयासों से 115 आदिवासी भाई-बहनों ने अपने मूल सनातन धर्म में वापस लौटने और अपनी संस्कृति से दोबारा जुड़ने का संकल्प लिया।
यह खास आयोजन ग्राम नेऊर के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला परिसर में “जनजाति गौरव सम्मान एवं अभिनंदन समारोह” के रूप में संपन्न हुआ। इस अवसर पर विधायक बोहरा ने स्वयं वापस आए आदिवासियों के पैर पखारकर उनका स्वागत किया। यह भावनात्मक दृश्य पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बन गया।
अपनी जड़ों से जुड़ने की आदिवासियों की पुकार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक भावना बोहरा ने कहा कि आदिवासी समाज भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपराओं को संजोने वाले हैं। उनका जीवन प्रकृति, लोकदेवता और सामूहिकता पर आधारित रहा है।
बोहरा ने इस अवसर को केवल एक धार्मिक कार्यक्रम मानने से इंकार किया और कहा कि यह “घर वापसी” भारतीय अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा का एक अटूट संकल्प है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि कुछ निहित स्वार्थ वाले तत्व हमारे भोले-भाले जनजातीय भाइयों को प्रलोभन और भ्रम में डालकर उनकी जड़ों से काटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भाजपा सरकार उनके इरादों को कभी सफल नहीं होने देगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्मांतरण के नाम पर “नया नियम” जैसी पुस्तकें वितरित करने वालों का लक्ष्य आदिवासियों की सहायता करना नहीं, बल्कि उन्हें उनकी पहचान से दूर करना है।
विकास और सम्मान के रास्ते पर वनांचल
विधायक बोहरा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आदिवासी समुदाय के समग्र विकास के लिए लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
“प्रधानमंत्री जनमन योजना” के तहत वनांचल क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुंचाई जा रही हैं।
पंडरिया विधानसभा में अब तक 3000 से अधिक पीएम आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं।
100 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
पेयजल की आपूर्ति टैंकरों के माध्यम से नियमित रूप से सुनिश्चित की जा रही है।
आदिवासी समाज को सर्वोच्च सम्मान दिलाने की दिशा में देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का चुना जाना “नए भारत” की भावना को साकार करता है। उन्होंने बल दिया कि हमारी संस्कृति जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संदेश देती है, और इसे बचाना केवल सरकार का नहीं, बल्कि हर नागरिक का पवित्र कर्तव्य है।
निरंतर जारी ‘घर वापसी’ का यह अभियान
यह उल्लेखनीय है कि विधायक भावना बोहरा के प्रयासों से यह पहली ‘घर वापसी’ नहीं है। इससे पहले भी 70 से अधिक आदिवासी परिवार अपनी मूल संस्कृति में लौट चुके हैं। इस बार यह संख्या बढ़कर 115 तक पहुंच गई है। जनजाति समाज के लोगों ने अपनी जड़ों से पुनः जुड़ने पर गर्व और संतोष व्यक्त किया है।
समारोह में उपस्थित वरिष्ठ समाजसेवी हरीश लुनिया ने विधायक की इस पहल को “आदिवासी अस्मिता के पुनर्जागरण” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। कबीरधाम जिला भाजपा अध्यक्ष राजेंद्र चंद्रवंशी ने इसे “सिर्फ घर वापसी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का पुनर्जन्म” करार दिया।
कार्यक्रम में बैगा जनजाति समाज के वरिष्ठजन, भाजपा के मंडल अध्यक्ष, पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए।
















