हेल्थ

चमगादड़ों में मिला कोरोना का नया समूह : क्या भविष्य के लिए है यह बड़ा खतरा?

नई दिल्ली (एजेंसी)। दुनिया अभी हंता वायरस जैसी चुनौतियों से जूझ ही रही है कि वैज्ञानिकों ने एक और चिंताजनक खोज की है। हाल ही में हुए एक शोध में विशेषज्ञों ने चमगादड़ों में कोरोना वायरस के एक नए समूह (Clade) का पता लगाया है, जो संभावित रूप से मनुष्यों को संक्रमित करने की क्षमता रखता है।

शोध के मुख्य बिंदु

जापान की टोक्यो यूनिवर्सिटी और थाईलैंड की चुलालोंगकोर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने संयुक्त रूप से यह अध्ययन किया है। इस रिसर्च के परिणाम 6 मई 2026 को प्रसिद्ध विज्ञान पत्रिका ‘Cell’ में साझा किए गए। वैज्ञानिकों ने थाईलैंड के चाचोएंगसाओ प्रांत में पाए जाने वाले ‘हॉर्सशू’ (घोड़े की नाल जैसी नाक वाले) चमगादड़ों के नमूनों का विश्लेषण किया, जिसमें वायरस के इस नए समूह की पहचान हुई।

‘क्लेड बी’: कोविड-19 से कितनी समानता?

वैज्ञानिकों ने इस नए वायरस समूह को “क्लेड बी” (Clade B) नाम दिया है। शोध के अनुसार, इस वायरस की संरचना काफी हद तक सार्स-कोव-2 (SARS-CoV-2) से मिलती-जुलती है, जिसने 2020 में वैश्विक महामारी फैलाई थी।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह नया वायरस भी इंसानी शरीर में प्रवेश करने के लिए ACE2 (Angiotensin-Converting Enzyme 2) रिसेप्टर का उपयोग कर सकता है। सरल शब्दों में कहें तो, यह उसी “ताले” का इस्तेमाल करता है जिसका उपयोग कोविड-19 वायरस हमारे शरीर की कोशिकाओं में घुसने के लिए करता था।

क्या यह जानलेवा हो सकता है?

फिलहाल, वैज्ञानिकों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह वायरस सीधे तौर पर इंसानों में फैलना शुरू हुआ है या नहीं। अभी यह शोध के चरण में है, लेकिन इसकी संक्रमण क्षमता को देखते हुए स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चमगादड़ प्राकृतिक रूप से कई वायरसों के वाहक होते हैं, और भविष्य की महामारियों से बचने के लिए इन पर नज़र रखना बेहद ज़रूरी है।

हंता वायरस का बढ़ता जोखिम

एक तरफ जहाँ कोरोना के नए स्वरूपों पर रिसर्च जारी है, वहीं हंता वायरस (Hantavirus) ने भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नींद उड़ा रखी है।

कैसे फैलता है: यह मुख्य रूप से चूहों और कुतरने वाले जीवों के मल-मूत्र या लार के संपर्क में आने से फैलता है।

संक्रमण का तरीका: यदि कोई व्यक्ति संक्रमित हवा या धूल में सांस लेता है, तो यह वायरस फेफड़ों तक पहुँच सकता है।

गंभीरता: हालांकि यह कोविड की तरह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेज़ी से नहीं फैलता, लेकिन संक्रमित व्यक्ति के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन खोजों का उद्देश्य डर फैलाना नहीं, बल्कि पूर्व तैयारी है। नए वायरसों की समय रहते पहचान करने से हम भविष्य में किसी भी बड़े स्वास्थ्य संकट या महामारी को रोकने में सक्षम हो सकेंगे। फिलहाल, स्वच्छता बनाए रखना और वन्यजीवों के सीधे संपर्क से बचना ही बचाव का सबसे बेहतर तरीका है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button