शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान : ‘मेरी जान को खतरा, षड्यंत्र के तहत फंसाने की कोशिश’

वाराणसी (एजेंसी)। वाराणसी के केदार घाट स्थित मठ में मीडिया से मुखातिब होते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने खुद पर लगे आरोपों को पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत करार दिया है। उन्होंने न केवल अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई, बल्कि इस पूरे मामले को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद से जोड़कर सनसनी फैला दी है।
प्रमुख बिंदु: जो शंकराचार्य ने कहा
सुरक्षा और गिरफ्तारी का डर: स्वामी जी ने आशंका जताई कि उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेजा जा सकता है, जहाँ उन्हें ‘जहरीली सुई’ के जरिए नुकसान पहुँचाने की साजिश रची जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे व्यक्तिगत रूप से अग्रिम जमानत के पक्ष में नहीं थे, लेकिन शिष्यों और मठ से जुड़े लोगों के दबाव में उन्होंने यह कदम उठाया है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल: उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जाँच की गोपनीय रिपोर्ट एक ऐसा व्यक्ति सार्वजनिक कर रहा है जिसका अपना रिकॉर्ड आपराधिक रहा है। स्वामी जी ने पूछा कि क्या पुलिस ने शिकायतकर्ता को अपना आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त कर लिया है?
पोक्सो (POCSO) मामले में गोपनीयता: उन्होंने तर्क दिया कि कानूनन इस तरह के संवेदनशील मामलों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए, लेकिन यहाँ नियमों को ताक पर रखकर तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है।
आश्रम की व्यवस्था और ‘शीश महल’ विवाद: मठ की भव्यता और शीशों के उपयोग पर उन्होंने कहा कि पारदर्शिता के लिए शीशों का होना गलत नहीं है। उन्होंने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कहा कि आश्रम में छात्र निवास करते हैं, इसलिए कैमरे के साथ प्रवेश वर्जित है, लेकिन कोई भी व्यक्ति बिना कैमरे के पूरे परिसर का निरीक्षण कर सकता है।
‘एपस्टीन फाइल’ से कनेक्शन का दावा
शंकराचार्य ने इस पूरे विवाद को एक अंतरराष्ट्रीय मोड़ देते हुए आरोप लगाया कि यह सब ‘एपस्टीन फाइल’ से ध्यान भटकाने की एक कोशिश है। उनका दावा है कि उस फाइल में देश की कई रसूखदार हस्तियों के नाम शामिल हैं और उन बड़े नामों को बचाने के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाकर जनता का ध्यान मोड़ा जा रहा है।
“भारत में कानून और न्यायपालिका का किस स्तर तक दुरुपयोग किया जा सकता है, यह वर्तमान घटनाक्रम का एक जीवंत उदाहरण है।”
— स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद















