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बस्तर में नक्सलियों का ऐतिहासिक आत्मसमर्पण : करोड़ों की नकदी और सोना बरामद

बस्तर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर में सुरक्षाबलों को एक अभूतपूर्व कामयाबी मिली है। बुधवार को एक साथ 108 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इसे राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण माना जा रहा है।

भारी मात्रा में हथियार और खजाना जब्त

नक्सलियों के सरेंडर के साथ ही सुरक्षाबलों ने उनके पास से बड़ी मात्रा में संपत्ति और असलहा बरामद किया है:

नकद राशि: जमीन के भीतर ड्रम में छिपाकर रखे गए 3.60 करोड़ रुपये बरामद किए गए हैं। ये सभी 500-500 के नोट थे, जिन्हें अवैध वसूली के जरिए जुटाया गया था।

सोना: लगभग 1 किलो सोना जब्त हुआ है, जिसकी बाजार कीमत करीब 1.60 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस अब इसकी जांच कर रही है कि नक्सलियों के पास इतनी बड़ी मात्रा में कीमती धातु कहाँ से आई।

हथियार: कुल 101 आधुनिक हथियार सौंपे गए हैं, जिनमें 6 एके-47, 11 इंसास राइफल, और 5 एसएलआर जैसे घातक हथियार शामिल हैं।

संगठनात्मक ढांचे को करारा झटका

सरेंडर करने वाले सभी नक्सली DKSZC (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) समूह से जुड़े हैं। इनमें संगठन के कई ऊंचे ओहदों वाले कैडर शामिल हैं:

6 DVC (डिविजनल कमेटी सदस्य)

3 CYPCM और 18 PPCM स्तर के सदस्य

23 ACM (एरिया कमेटी सदस्य) और 56 सक्रिय सदस्य

राज्य सरकार के अनुसार, नक्सलियों की 30 सेंट्रल कमेटियों में से अब केवल 4 ही शेष बची हैं, बाकी 26 का पूरी तरह सफाया हो चुका है।

शासन और प्रशासन का रुख

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस सफलता को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि नक्सली एरिया कमेटियां तेजी से खत्म हो रही हैं और जल्द ही बची हुई कमेटियों को भी समाप्त कर दिया जाएगा।

वहीं, डीजीपी अरुण देव गौतम ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जो लोग आत्मसमर्पण नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि विभाग तय समय सीमा (डेडलाइन) से पहले ही राज्य को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य हासिल कर लेगा। फिलहाल पुलिस को कुख्यात नक्सली ‘पापाराव’ जैसे बड़े चेहरों की सरगर्मी से तलाश है।

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