संघर्ष से सफलता तक : बस्तर की राजकुमारी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में दरभा ब्लॉक के छोटे से गाँव लेंड्रा की रहने वाली राजकुमारी कश्यप की कहानी आज हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। एक समय था जब राजकुमारी का जीवन अनिश्चितताओं और आर्थिक तंगी के साये में बीत रहा था। परिवार पालने के लिए उन्हें दूसरों के खेतों में मजदूरी करनी पड़ती थी या फिर वनोपज इकट्ठा करने के लिए जंगलों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन उनके अटूट संकल्प ने उनकी तकदीर बदल दी।
‘बिहान’ ने बदली जिंदगी की दिशा
राजकुमारी के जीवन में असली बदलाव साल 2015 में आया, जब वह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत ‘सूरजमुखी महिला स्व-सहायता समूह’ से जुड़ीं। समूह के माध्यम से मिले प्रशिक्षण और मार्गदर्शन ने उनमें नया आत्मविश्वास फूँका। उन्होंने केवल मजदूरी तक सीमित न रहकर खुद का व्यवसाय शुरू करने का साहस दिखाया।
उनकी आय के प्रमुख साधन:
पशुपालन: उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन को अपनाया।
चूजा ब्रूडिंग इकाई: वे अब न केवल अपने क्षेत्र में, बल्कि दूसरे ब्लॉकों में भी चूजों की सप्लाई करती हैं।
टीकाकरण सेवाएं: पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल और टीकाकरण के काम में भी वे दक्ष हो चुकी हैं।
राशन दुकान: आजीविका के विविधीकरण के लिए वे सफलतापूर्वक राशन दुकान का संचालन भी कर रही हैं।
मजदूरी से लखपति दीदी तक का सफर
पिछले 11 वर्षों की मेहनत का परिणाम आज राजकुमारी के बढ़ते आर्थिक स्तर के रूप में साफ दिखाई देता है। कभी दूसरों के आश्रित रहने वाली राजकुमारी की सालाना आय अब 3.5 से 4 लाख रुपये तक पहुँच गई है।
उनकी उपलब्धियां:
पक्का मकान: मिट्टी के घर से निकलकर अब उन्होंने अपना पक्का घर बना लिया है।
वाहनों की मालकिन: आज उनके पास खेती के लिए ट्रैक्टर, दो मोटरसाइकिल और खुद की कार भी है।
बेहतर शिक्षा: आर्थिक मजबूती के कारण वे अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने में सक्षम हुई हैं।
नेतृत्व: वर्तमान में वे संकुल संगठन की अध्यक्ष के तौर पर अन्य महिलाओं का नेतृत्व कर रही हैं।
भावी लक्ष्य: राजकुमारी अब अपनी खुद की हैचरी (मदर यूनिट) स्थापित करने का सपना देख रही हैं, ताकि वे अपने व्यवसाय को बड़े स्तर पर ले जा सकें और गाँव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ सकें।
















