डेड ज़ोन में भी चलेगा फोन : एयरटेल और स्टारलिंक ने सैटेलाइट के जरिए मुमकिन की कनेक्टिविटी

न्युज डेस्क (एजेंसी)। अक्सर पहाड़ी इलाकों या दूर-दराज के क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क का ‘नो सिग्नल’ होना एक बड़ी समस्या रही है, लेकिन अब एयरटेल अफ्रीका और एलन मस्क की कंपनी SpaceX ने इसका समाधान खोज लिया है। दोनों कंपनियों ने मिलकर स्टारलिंक मोबाइल की मदद से डेटा और मैसेजिंग सर्विस का सफल परीक्षण किया है।
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उन जगहों पर भी काम करती है जहाँ पारंपरिक मोबाइल टावर (टेरेस्ट्रियल नेटवर्क) नहीं पहुँच पाते।
क्या है इस तकनीक की खासियत?
इस ट्रायल के दौरान कुछ महत्वपूर्ण बातें सामने आईं:
स्मार्टफोन की अनुकूलता: इस सर्विस के लिए किसी खास सैटेलाइट फोन की जरूरत नहीं पड़ी। सामान्य 4G स्मार्टफोन्स ने सीधे स्टारलिंक के सैटेलाइट समूह से जुड़कर काम किया।
मजबूत सैटेलाइट नेटवर्क: करीब 650 से अधिक सैटेलाइट्स की मदद से उन खाली जगहों (Coverage gaps) को भरा गया जहाँ नेटवर्क गायब रहता है।
बिना टावर के इंटरनेट: यह परीक्षण साबित करता है कि अब कनेक्टिविटी के लिए ज़मीनी इंफ्रास्ट्रक्चर या मोबाइल टावरों पर निर्भर रहना अनिवार्य नहीं होगा।
ट्रायल में क्या-क्या सफल रहा?
परीक्षण के दौरान यूज़र्स सिर्फ कॉल ही नहीं, बल्कि कई डिजिटल काम भी कर पाए:
सोशल मीडिया: WhatsApp कॉलिंग और Facebook Messenger जैसे ऐप बिना किसी बाधा के चले।
बैंकिंग सर्विस: यूज़र्स ने एयरटेल ऐप के माध्यम से वित्तीय लेनदेन (Financial Transactions) भी सफलतापूर्वक किए।
मैसेजिंग: मैसेज भेजने और प्राप्त करने में कोई समस्या नहीं आई।
“इस सफल टेस्टिंग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक चाहे दुनिया के किसी भी कोने में हो, वह हमेशा नेटवर्क से जुड़ा रहे।” — एयरटेल अफ्रीका
आगे की योजना और भारत का भविष्य
एयरटेल अफ्रीका अब इस तकनीक को अपने 14 प्रमुख बाजारों में उतारने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, यह सेवा आम जनता के लिए कब शुरू होगी, यह पूरी तरह से संबंधित देशों की सरकारी मंज़ूरी और रेगुलेटरी नियमों पर निर्भर करेगा।
जहाँ तक भारत की बात है, एयरटेल ने फिलहाल भारतीय बाजार में इस सेवा को शुरू करने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन भविष्य में इसके आने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।














