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रतनपुर का गिरजाबंध मंदिर : जहाँ नारी स्वरूप में पूजे जाते हैं ‘संकटमोचन’

न्युज डेस्क (एजेंसी)। भारत विविधताओं और आस्थाओं का देश है, जहाँ कदम-कदम पर भक्ति के अनोखे रंग देखने को मिलते हैं। आमतौर पर हम हनुमान जी को बलशाली पुरुष और बाल ब्रह्मचारी के रूप में देखते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के पास स्थित रतनपुर में एक ऐसा मंदिर है, जो पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है। यहाँ हनुमान जी किसी वीर योद्धा नहीं, बल्कि एक देवी (स्त्री) के रूप में विराजमान हैं।

राजा के स्वप्न से जुड़ी है अद्भुत कथा

इस मंदिर के निर्माण के पीछे एक बेहद दिलचस्प और प्राचीन कहानी छिपी है। जनश्रुति के अनुसार, सदियों पहले रतनपुर के राजा पृथ्वी देवजू एक असाध्य कुष्ठ रोग (कोढ़) से ग्रसित थे। तमाम उपचारों के बाद भी जब वे ठीक नहीं हुए, तब एक रात उनके स्वप्न में हनुमान जी आए।

हनुमान जी ने राजा को स्त्री स्वरूप में दर्शन दिए और निर्देश दिया कि वे एक मंदिर का निर्माण करवाएं और पास ही में एक तालाब (कुंड) खुदवाएं। प्रभु ने कहा कि उस कुंड में स्नान करने से राजा की बीमारी पूरी तरह ठीक हो जाएगी।

कुंड से प्रकट हुई दिव्य प्रतिमा

राजा ने बिना देर किए भगवान के आदेश का पालन किया। जब मंदिर और तालाब का काम चल रहा था, तब महामाया कुंड से एक पत्थर की प्रतिमा निकली। आश्चर्य की बात यह थी कि वह प्रतिमा ठीक वैसी ही थी, जैसा रूप राजा ने अपने सपने में देखा था—एक नारी स्वरूप!

मान्यता: प्रतिमा की स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद जैसे ही राजा ने उस पवित्र कुंड में स्नान किया, उनका वर्षों पुराना रोग चमत्कारिक रूप से समाप्त हो गया।

मंदिर की विशेषताएं और आस्था

गिरजाबंध हनुमान मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह स्थान आज लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। यहाँ की कुछ मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

अनोखा श्रृंगार: यहाँ हनुमान जी का श्रृंगार और वेशभूषा एक देवी की तरह की जाती है।

मनोकामना पूर्ति: भक्तों का विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती। लोग अपनी परेशानियां लेकर आते हैं और ‘स्त्री रूपी हनुमान’ के दर्शन कर शांति पाते हैं।

ऐतिहासिक महत्व: यह मंदिर न केवल धार्मिक बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी छत्तीसगढ़ के पर्यटन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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