छत्तीसगढ़

जन-कल्याण की राह : डौण्डी के भैंसबोड़ में उमड़ा जनसैलाब, मौके पर ही सुलझीं सैकड़ों समस्याएँ

बालोद। शासकीय योजनाओं की पहुँच समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक सुनिश्चित करने के लिए बालोद जिला प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रहा है। इसी सिलसिले में आदिवासी बहुल विकासखंड डौण्डी के अंतर्गत आने वाले ग्राम भैंसबोड़ में ‘सुशासन तिहार 2026’ के तहत एक विशाल जन-समस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। इस भव्य शिविर में आस-पास की 18 ग्राम पंचायतों के हज़ारों ग्रामीणों ने हिस्सा लिया, जहाँ न केवल उनकी शिकायतों का तत्काल निपटारा हुआ, बल्कि वे शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से सीधे लाभान्वित भी हुए।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य एथेलेटिक संघ के उपाध्यक्ष सौरभ लुनिया, जनपद पंचायत अध्यक्ष मुकेश कौड़ो, जनपद उपाध्यक्ष भोलाराम नेताम सहित मिथलेश निरोटी, नीलिमा श्याम, मनीष झा जैसे वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रशासनिक नेतृत्व कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा और जिला पंचायत सीईओ सुनील चंद्रवंशी ने संभाला।

मंच से हुआ योजनाओं का सीधा वितरण: बदले ग्रामीणों के दिन

इस सुशासन मेले में विभिन्न शासकीय विभागों द्वारा हितग्राहियों को सीधे तौर पर अधिकार पत्र और सामग्रियां सौंपी गईं:

आवास और आजीविका: प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को उनके पक्के मकानों का पूर्णता प्रमाण पत्र सौंपा गया। वहीं, श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों को श्रम कार्ड और मछुआरों को मत्स्य पालन संवर्धन योजना के तहत मछली पकड़ने के जाल बांटे गए।

सशक्तिकरण और सुरक्षा: दिव्यांगजनों को उनके जीवन को सुगम बनाने के लिए छड़ियाँ और श्रवण यंत्र दिए गए। बुजुर्गों को वृद्धावस्था पेंशन के अधिकार पत्र और ग्रामीणों को ‘स्वामित्व योजना’ के तहत उनकी भूमि के दस्तावेज़ (अधिकार अभिलेख) सौंपे गए।

कृषि और राशन: अन्नदाताओं को आधुनिक डिजिटल किसान किताबें दी गईं और ज़रूरतमंद परिवारों को नए राशन कार्ड वितरित किए गए।

विशेष पहल: मेडिकल बोर्ड और सामाजिक सरोकार

शिविर में दिव्यांगजनों को सहूलियत देने के लिए एक विशेष मेडिकल बोर्ड तैनात किया गया था, जिसने मौके पर ही जांच कर दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए। इसके अतिरिक्त, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा नन्हें बच्चों के लिए अन्नप्राशन संस्कार आयोजित किया गया और गर्भवती माताओं की गोदभराई कर उन्हें पोषण से भरपूर ‘सुपोषण किट’ प्रदान की गई।

“जनजातीय गरिमा उत्सव 2026” का शंखनाद

भैंसबोड़ के इस सुशासन मंच से जिला प्रशासन ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण जनभागीदारी अभियान “जनजातीय गरिमा उत्सव 2026” की औपचारिक शुरुआत की। इस अभियान का मूल उद्देश्य देश और समाज के विकास में जनजातीय समाजों के ऐतिहासिक योगदान, उनकी समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली विरासत को सम्मानित करना है, साथ ही उन्हें मुख्यधारा की विकास योजनाओं से और मज़बूती से जोड़ना है।

कलेक्टर की दो टूक: “एक महीने के भीतर हो हर आवेदन पर कार्रवाई”

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का मुख्य ध्येय गांवों तक खुद पहुँचकर लोगों की वास्तविक ज़रूरतों को समझना और उनका समाधान करना है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि शिविर में आए हर आवेदन पर अधिकतम एक माह के भीतर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।

कलेक्टर ने राजस्व विभाग को सीमांकन, नामांतरण और आपसी बंटवारे जैसे मामलों को तय समय-सीमा में सुलझाने को कहा। इसके अलावा उन्होंने अभिभावकों से बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए टीका लगवाने, किसानों को एग्रीस्टेक पोर्टल पर पंजीकृत होने और “जल संचय-जनभागीदारी 2.0” अभियान को सफल बनाने की अपील की। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से मिटाने की शपथ भी दिलाई।

आँकड़ों की ज़ुबानी: सुशासन तिहार की सफलता

समारोह में मुख्य रूप से भर्रीटोला, रजही, चिपरा, धुर्वाटोला, सुवरबोड, गिधाली, भैंसबोड़, दानीटोला, गुजरा, खलारी, अड़जाल, कुसुमकसा, अरमुरकसा, पथरटोला, खम्हारटोला, बिटाल, धोबेदण्ड एवं धोबनी पंचायतों के ग्रामीण शामिल हुए।

प्रमुख बिंदु विवरण
शामिल ग्राम पंचायतें 18
कुल प्राप्त आवेदन 902
ऑन-द-स्पॉट (तत्काल) निराकरण 801 (लगभग 89%)
शेष आवेदनों की अंतिम समय-सीमा अधिकतम 30 दिन

विशिष्ट अतिथि सौरभ लुनिया ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए काम कर रही हैं। यह सुशासन तिहार इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सरकार की योजनाएं कागजों से निकलकर सीधे जमीन पर उतर रही हैं।

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